H-1B Visa: अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर ट्रंप प्रशासन ने निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों के उस तरीके पर कार्रवाई की बात कही है, जिसमें अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बाद उन्हीं भूमिकाओं के लिए H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की कोशिश की जाती है। इस नीति का असर भारतीय पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि H-1B वीजा पाने वाले लाभार्थियों में भारत से जन्मे लोगों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। USCIS की वित्त वर्ष 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीकृत H-1B याचिकाओं में 71 प्रतिशत लाभार्थी भारत में जन्मे थे।
H-1B Visa: अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी पर कंपनियों की होगी ज्यादा जांच
जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसे मामलों पर चिंता जताई, जहां कंपनियां H-1B वीजा के लिए आवेदन करते समय कर्मचारियों की कमी का दावा करती हैं, जबकि उनके रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे तरीकों पर विचार कर रही है, जिनसे कंपनियों को अमेरिकी वर्कफोर्स में कटौती के साथ-साथ विदेशी कर्मचारियों की जरूरत का दावा करने से रोका जा सके।
Vice President Vance on the Trump Administration's H1B visa reforms:
— Vice President JD Vance (@VP) September 27, 2026
"The H-1B should not exist to replace American workers with low-wage foreigners. It should exist to enrich the American economy." pic.twitter.com/7bunZ97u5Z
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को उनकी जगह रखने के लिए नहीं होना चाहिए। प्रशासन के मुताबिक इस वीजा कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना है।
18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B कार्यक्रम को लेकर एक कार्यकारी आदेश जारी किया। इसमें संबंधित अमेरिकी एजेंसियों को H-1B आवेदन और याचिकाओं की समीक्षा करते समय नियोक्ता की हालिया या प्रस्तावित छंटनी को ध्यान में रखने का निर्देश दिया गया है, खासकर तब जब इससे समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित हो सकता है।
H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की फीस का प्रावधान
ट्रंप प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम को लेकर एक अलग घोषणा भी की है। 18 सितंबर की राष्ट्रपति घोषणा के अनुसार, कुछ नए H-1B मामलों में अमेरिका के बाहर मौजूद कर्मचारियों के लिए याचिका के साथ $100,000 का भुगतान जरूरी किया गया है। यह प्रतिबंध 21 सितंबर 2026 से लागू हुआ और घोषणा के मुताबिक इसमें कुछ अपवाद भी हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह व्यवस्था पहले सितंबर 2025 में लागू की गई थी और अब इसे अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाया गया है। प्रशासन ने इसे H-1B कार्यक्रम में कथित दुरुपयोग रोकने और अमेरिकी श्रम बाजार पर असर को कम करने की नीति से जोड़ा है।
इसके अलावा, 18 सितंबर के कार्यकारी आदेश में विदेश विभाग, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को H-1B प्रक्रिया में रोजगार, वेतन और उद्योग से जुड़े अतिरिक्त आंकड़ों के आधार पर समन्वय बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
H-1B Visa: भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ सकता है असर?
H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देने वाला प्रमुख वीजा कार्यक्रम है। इसका इस्तेमाल टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और दूसरे विशेष क्षेत्रों में किया जाता है। भारत से बड़ी संख्या में आईटी और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स इस कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं।
USCIS की वित्त वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, उस साल स्वीकृत H-1B याचिकाओं में 71 प्रतिशत लाभार्थी भारत में जन्मे थे, जबकि चीन में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत थी। इस वजह से H-1B नियमों में होने वाले बड़े बदलावों का प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।
हालांकि, नए नियमों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी एजेंसियां इन्हें किस तरह लागू करती हैं और किन कंपनियों या आवेदनों पर अतिरिक्त जांच की जाती है। मौजूदा आदेशों में विशेष रूप से उन मामलों की समीक्षा बढ़ाने की बात कही गई है, जहां नियोक्ता की छंटनी और H-1B आवेदन के बीच संबंध दिखाई देता है।
H-1B कंपनियों के लिए भी बढ़ सकती हैं चुनौतियां
ट्रंप प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम में कंपनियों की भूमिका की जांच बढ़ाने का संकेत दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि नियोक्ता H-1B कर्मचारियों का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को विस्थापित करने के लिए न करें। इसके तहत आवेदन प्रक्रिया में कंपनियों के रोजगार रिकॉर्ड और हालिया छंटनी को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
व्हाइट हाउस ने यह भी बताया है कि सितंबर 2025 में लागू प्रतिबंधों के बाद बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा दाखिल H-1B रजिस्ट्रेशन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रशासन के अनुसार, सबसे बड़ी आईटी स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों के संयुक्त रजिस्ट्रेशन 24,946 से घटकर 2,055 रह गए, हालांकि यह आंकड़ा प्रशासन द्वारा अपने नीति प्रभाव के आकलन में दिया गया है।
इस पूरी नीति का केंद्र अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और H-1B कार्यक्रम की निगरानी है। भारतीय पेशेवरों के लिए इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि H-1B लाभार्थियों में भारत से जुड़े कर्मचारियों की हिस्सेदारी लंबे समय से सबसे बड़ी रही है।
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