BY: MOHIT JAIN
ग्वालियर के लोग जिस मेले का पूरे साल इंतजार करते हैं, वह अब नजदीक है। श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला इस साल भी अपनी भव्यता और परंपरा के साथ 25 दिसंबर से 25 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और इस बार वाहन खरीदने वालों के लिए रोड टैक्स में 50% छूट का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
मेले की तारीख और अवधि
ग्वालियर में इस वर्ष श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला 25 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 25 फरवरी 2026 तक चलेगा। यह मेला पिछले 120 साल से क्षेत्र की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा बना हुआ है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर और रोड टैक्स छूट

मेले की मुख्य आकर्षण ऑटोमोबाइल सेक्टर है। इस बार संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने मेला में वाहन खरीद पर 50% रोड टैक्स छूट के लिए शासन को पत्र लिखा है। इसका उद्देश्य है कि मेला शुरू होते ही वाहन खरीदारों को लाभ मिले।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में 38 दुकानों के ऑनलाइन आवेदन पहले ही एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर आ चुके हैं।
मेला व्यवस्थाएं और तैयारी
मेला सचिव सुनील त्रिपाठी ने बताया कि 32 बकायदार दुकानदारों ने 4,79,660 रुपए जमा कर एनओसी प्राप्त कर ली है।
मेले के लिए साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।
ऐतिहासिक महत्व
ग्वालियर मेला 1905 में महाराज माधवराव सिंधिया द्वारा ‘मेला मवेशियान’ के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पशुधन की नस्ल सुधारना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और ग्वालियर अंचल के उत्पादों का प्रचार करना था।

वर्ष 1918 में यह मेला स्थायी रूप से रेसकोर्स रोड पर स्थापित किया गया। 1984 में इसे राज्य स्तरीय ट्रेड फेयर का दर्जा मिला।
व्यापार और संस्कृति का संगम
समय के साथ मेला केवल व्यापारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक, मनोरंजन और जनसंवाद का बड़ा मंच बन गया। ग्रामीण कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने इस मेले में अपनी कला का प्रदर्शन किया।
वर्ष 2002 में इसे ‘श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला’ नाम दिया गया और 1996 के ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण अधिनियम के तहत प्रबंधन स्वतंत्र प्राधिकरण को सौंपा गया।

डिजिटल और आधुनिक पहल
आज ग्वालियर मेला ऑनलाइन दुकान आवंटन, थीम आधारित पवेलियन और प्रदेशभर के उद्योगों की सहभागिता के कारण आधुनिकता का प्रतीक बन चुका है। साथ ही लोककला, हस्तशिल्प, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसकी जीवंतता को बनाए रखते हैं।
ग्वालियरवासी इस मेले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो इस बार परंपरा और तकनीक का संगम लेकर आने वाला है।





