ग्वालियर के मुरार इलाके में बुधवार को पांच घंटे की बिजली कटौती ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक बिजली नहीं रही, जिससे मरीज और उनके परिजन उमस और गर्मी से बेहाल हो गए।
अस्पताल का जनरेटर पिछले 7 दिन से खराब था, बावजूद इसके प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।
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पांच घंटे तक बिजली गुल, अस्पताल में मची अफरा-तफरी
- बिजली कटौती पहले से घोषित थी, फिर भी कोई तैयारी नहीं की गई।
- तेज धूप और उमस में मरीज पसीने से तर-बतर हो गए।
- बिजली कटौती के दौरान वार्ड और ओपीडी दोनों में अव्यवस्था रही।
ऑपरेशन रूम ठप, आधा दर्जन से ज्यादा ऑपरेशन टले
बुधवार को जिला अस्पताल में कुल 10 से ज्यादा ऑपरेशन होने थे।
- बिजली जाने से पहले केवल 3 ऑपरेशन हो पाए।
- बाकी आधा दर्जन से ज्यादा ऑपरेशन टाल दिए गए।
- कई मरीज जो लंबे इंतजार के बाद ऑपरेशन की तारीख पाए थे, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
पैथोलॉजी विभाग में जांचें भी रुकीं
- बिजली नहीं होने से पैथोलॉजी में जांचें प्रभावित हुईं।
- सैंपल लेने के बाद कम्प्यूटर सिस्टम बंद रहने से जांचें आगे नहीं बढ़ पाईं।
- जांच कराने पहुंचे मरीज घंटों लंबी कतारों में खड़े रहे।
जनरेटर 7 दिन से खराब, प्रबंधन पर उठे सवाल
अस्पताल प्रशासन को पहले से पता था कि जनरेटर खराब है, बावजूद इसके वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
इस लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में पड़ी।
मरीजों का गुस्सा: “यह खुली लापरवाही है”
- अजीत कुमार के परिजन: “डॉक्टर ने ऑपरेशन से पहले खाने को मना किया था, इसलिए रात से भूखे थे। बिजली कटने से ऑपरेशन टल गया।”
- रमेश कुमार: “सुबह से पैथोलॉजी के बाहर लाइन में थे, लेकिन बिजली न होने से जांच ही नहीं हो पाई।”
सवालों के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
यह घटना जिला अस्पताल की लापरवाही को उजागर करती है।
- पहले से घोषित बिजली कटौती के बावजूद कोई बैकअप प्लान नहीं बनाया गया।
- मरीजों को पांच घंटे तक गर्मी में बेहाल रहना पड़ा।
- ऑपरेशन और जांच जैसी गंभीर सेवाएं ठप हो गईं।
यह खबर अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को सामने लाती है। बिजली कटौती जैसी सामान्य परिस्थितियों के लिए भी यदि कोई बैकअप प्लान नहीं है, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा खतरा है।





