AI को लेकर कानून बनाएगी केंद्र सरकार

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Government will make law regarding AI

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दिया बयान

दिल्ली: एआई के इस्तेमाल को लेकर मोदी सरकार जल्द ही कानून बना सकती है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में इस ओर इशारा किया है। दरअसल कांग्रेस सांसद अदूर प्रकास ने सरकार से सवाल किया था कि, ‘एआई को लेकर क्या सरकार की कानून बनाने की कोई योजना है’। कांग्रेस सांसद के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, ‘ेआई पर कानून लाने के विचार के लिए सरकार तैयार है, इसके लिए आम सहमति की ज़रूरत है, मोदी सरकार प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण में विश्वास करती है। यह चीज़े कांग्रेस के शासन काल में नहीं थी’। केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया।

क्या है एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया की श्रेष्ठ तकनीकों में से एक है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, आर्टिफिशियल और इंटेलिजेंस। इसका अर्थ होता है ‘मानव निर्मित सोच शक्ति’। इस तकनीक की सहायता से ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है जो मानव के समान बुध्दिमत्ता का इस्तेमाल करके कार्य कर सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से अल्गोरिदम सीखने, पहचानने, समस्या समाधान, भाषा, लॉजिकल रीज़निंग, डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग, बॉयोइंफार्मेटिक्स तथा मशीन बायोलॉजी को आसानी से समझा जा सकता है। इसके अलावा यह तकनीक खुद सोचने समझने और कार्य करने में सक्षम है।  

एआई से होने वाले नुकसान

सीमित दायरा संकीर्ण: AI सिस्टम विशिष्ट कार्यों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन नई स्थितियों के अनुकूल होने की क्षमता का अभाव है। वे पूर्वनिर्धारित सीमाओं के भीतर काम करते हैं और अपनी विशेषज्ञता से बाहर के कार्यों का सामना करने पर संघर्ष कर सकते हैं।

मानवीय बुद्धिमत्ता का अभाव: संकीर्ण एआई में मानवीय बुद्धिमत्ता, सहानुभूति और सामान्य ज्ञान संबंधी तर्क क्षमता का अभाव होता है। यह सीमा संदर्भ को समझने, सूक्ष्म निर्णय लेने या जटिल परिदृश्यों को पूरी तरह से समझने की इसकी क्षमता को सीमित करती है।

डेटा निर्भरता: संकीर्ण एआई सिस्टम सटीक भविष्यवाणियां सीखने और करने के लिए उच्च-गुणवत्ता और प्रासंगिक डेटासेट पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। डेटासेट के भीतर पूर्वाग्रह और अशुद्धियाँ त्रुटिपूर्ण निर्णय लेने का कारण बन सकती हैं, या मौजूदा सामाजिक पूर्वाग्रहों को मजबूत कर सकती हैं, जिससे नैतिक चिंताएँ पैदा हो सकती हैं।

मानवीय भागीदारी में कमी: संकीर्ण AI सिस्टम पर अत्यधिक निर्भरता संभावित रूप से निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर सकती है। अधिकांश AI विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि AI तकनीक के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए स्वचालन और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

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