BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल | कटनी की रहने वाली अर्चना तिवारी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। एक तरफ पढ़ाई-लिखाई और करियर में ऊँचाइयाँ छूने का सपना, तो दूसरी तरफ घरवालों का शादी के लिए लगातार दबाव। यही खींचतान आखिरकार उसे नेपाल बॉर्डर तक ले गई, जहां से पुलिस ने बरामद कर लिया।
उच्च शिक्षा और वकालत से शुरुआत
अर्चना तिवारी ने अपनी पढ़ाई कटनी से पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एलएलबी किया और इसके बाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। कुछ समय वह जबलपुर में भी वकालत करती रहीं। उनकी मेहनत और समझदारी ने उन्हें जल्द ही अच्छा वकील बना दिया।
छात्र राजनीति से मजबूत पहचान
पढ़ाई के साथ-साथ अर्चना ने छात्र राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कटनी में वह छात्र नेता के तौर पर जानी जाती थीं और स्थानीय छात्र नेताओं से उनके गहरे संपर्क रहे। इससे उनका व्यक्तित्व और भी निखरा।
सिविल जज की तैयारी
वकालत करते हुए भी अर्चना का सपना बड़ा था। वह सिविल जज बनना चाहती थीं। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने इंदौर के एक प्राइवेट इंस्टिट्यूट में दाखिला लिया और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने लगीं। वकालत से उनकी अच्छी कमाई हो रही थी, लेकिन मन पूरी तरह जज की तैयारी पर केंद्रित था।
शादी का दबाव और विरोध
इस बीच परिवार ने उनकी शादी एक पटवारी के साथ तय कर दी। हालांकि अर्चना इस रिश्ते से खुश नहीं थीं। उनका मानना था कि पहले करियर सेट करना जरूरी है, शादी बाद में भी हो सकती है। कई बार उन्होंने साफ इंकार किया, लेकिन घरवाले उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुए।
मां से विवाद और भागने का फैसला
शादी की जिद को लेकर अर्चना की अपनी मां से कहासुनी भी हुई। लगातार दबाव बढ़ता देख उन्होंने घर छोड़ने का मन बना लिया। बताया जाता है कि हरदा के पास एक ढाबे पर बैठकर उन्होंने अपने दोस्त सारांश जोगबंद के साथ नेपाल भागने की योजना बनाई। हालांकि उनका यह प्लान ज्यादा समय तक सफल नहीं रहा और बॉर्डर पर पुलिस ने पकड़ लिया।
करियर को प्राथमिकता
करीबी बताते हैं कि अर्चना का मानना था कि जिस लड़के से उनकी शादी तय की जा रही थी, उसका प्रोफाइल उनके स्तर से मेल नहीं खाता था। यही वजह रही कि उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका सपना पहले करियर में मुकाम हासिल करना और फिर जीवन साथी चुनने का था।





