भानुप्रतापपुर। कोरर परिक्षेत्र के ग्राम डोंगर कट्टा में 18 जनवरी को हुए भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए वनकर्मी नारायण यादव का आज दुखद निधन हो गया। वे राजधानी के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के बाद अपने गृह ग्राम में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, लेकिन आज शाम अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चारामा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कैसे हुआ था हमला?
गौरतलब है कि 18 जनवरी को डोंगर कट्टा गांव में भालू ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। इस हमले में एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही वनकर्मी नारायण यादव मौके पर पहुंचे, लेकिन तभी अचानक भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें तत्काल इलाज के लिए राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इलाज के बाद भी नहीं बच पाई जान
अस्पताल में इलाज के बाद नारायण यादव की हालत में सुधार हुआ था, और वे अपने गांव लौटकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। लेकिन आज शाम अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें चारामा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के छह दिन बाद मृत मिला भालू
गौर करने वाली बात यह भी है कि इस घटना के छह दिन बाद वही भालू भी मृत अवस्था में पाया गया था। माना जा रहा है कि वह किसी बीमारी से ग्रसित था या फिर हमले के दौरान लगी चोटों के कारण उसकी भी मौत हो गई।
वन विभाग में शोक की लहर
वनकर्मी नारायण यादव के निधन से वन विभाग में शोक की लहर है। वे अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित थे और वन्यजीवों व जंगलों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहे थे। उनके निधन को वन विभाग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
यह घटना वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के लिए वन्यजीवों से सतर्क रहने का संदेश देती है। जंगलों के पास रहने वाले ग्रामीणों को भी वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने और सतर्कता बरतने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
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