रिपोर्टर: विशाल दुबे
उज्जैन में नकली नोट बनाने और उन्हें बाजार में चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। माधवनगर पुलिस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और करीब 4 लाख 97 हजार रुपये के जाली नोट बरामद किए हैं। पुलिस की यह कार्रवाई शहर में सक्रिय संगठित अपराध पर बड़ी चोट मानी जा रही है।
दुकानदार की शिकायत से खुला राज़
पूरा मामला तब सामने आया, जब एक दुकानदार को 23 हजार रुपये के नकली नोट मिले। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जांच के बाद पता चला कि नकली नोटों का यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और असली नोटों के बदले 30 प्रतिशत कीमत पर जाली नोट बेचता था।
कैसे बनते थे नकली नोट
गिरोह के पास से पुलिस ने नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जैसे कि कलर प्रिंटर, सीपीयू, केमिकल और बटर पेपर बरामद किए। बरामद नोट 500 और 2000 रुपये के थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी इन नोटों को बेहद सफाई से छापकर बाजार में खपाने की योजना बना रहे थे।
गिरोह का मास्टरमाइंड और आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का सरगना सुनील पाटिल पहले भी नकली नोट और एनडीपीएस एक्ट जैसे मामलों में जेल जा चुका है। गिरोह के अन्य सदस्य—दुर्गेश डाबी, शुभम कड़ोदिया, शेखर यादव, प्रहलाद और कमलेश—भी अपराधों में शामिल रह चुके हैं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि माधवनगर पुलिस ने इस कार्रवाई से बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है ताकि इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा का बयान:
“माधवनगर पुलिस ने नकली नोटों के रैकेट का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। हमने 4 लाख 97 हजार के जाली नोट और उपकरण बरामद किए हैं। इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।”





