DURG PROTEST : दुर्ग के हिंदी भवन के पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रही हैं। धरने में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) को 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। पिछले पांच दशकों से वे गांव-गांव और घर-घर जाकर महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को आमजन तक पहुंचा रही हैं। विभाग इस वर्ष गोल्डन जुबली मना रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है।

DURG PROTEST : कार्यकर्ताओं ने बताया कि पोषण और बाल विकास कार्यक्रमों के अलावा उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान सर्वे, जनजागरूकता और निर्वाचन कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें प्रतिमाह केवल 4500 रुपये और सहायिकाओं को 2500 रुपये मानदेय दिया जा रहा है।
धरने में शामिल महिलाओं की प्रमुख मांग है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम वेतनमान लागू किया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक कार्यकर्ताओं को 26,000 रुपये और सहायिकाओं को 22,100 रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग की गई है। साथ ही मध्य प्रदेश की तर्ज पर 1000 रुपये प्रतिमाह वृद्धि सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।

DURG PROTEST : भिलाई अध्यक्ष संगीता शुक्ला ने बताया कि तीसरी मांग सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, मासिक पेंशन, आकस्मिक मृत्यु पर सहायता राशि और समूह बीमा लागू करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। धरने के चलते दो दिनों तक बच्चों को पोषाहार वितरण भी प्रभावित रहेगा।





