Mohit Jain
Dhurandhar Box Office: रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की कमाई थमने का नाम नहीं ले रही है। वीक डेज में गिरावट की आशंकाओं के बीच भी फिल्म ने अपनी पकड़ बनाए रखी और छठे दिन जोरदार कमाई की। भले ही बुधवार को आंकड़े पांचवें दिन से थोड़े कम रहे हों, लेकिन फिल्म ने शाहरुख खान की दो मेगा ब्लॉकबस्टर फिल्मों जवान और पठान को पछाड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया है।
छह दिनों में ही धुरंधर 200 करोड़ के क्लब के करीब पहुंच गई है और जिस तरह दर्शक इस फिल्म को सराह रहे हैं, उससे दूसरा वीकेंड भी जोरदार रहने की उम्मीद है।

Dhurandhar Box Office :संडे को सबसे ज़्यादा कमाई
धुरंधर का सबसे शानदार प्रदर्शन संडे को देखने को मिला था, जिसके बाद से फिल्म की रफ्तार बनी हुई है। अक्षय खन्ना और संजय दत्त के बीच भिड़ंत भी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। हालांकि छठे दिन फिल्म छावा से पीछे रह गई, जिसे उसने एक दिन पहले पछाड़ा था।
छठे दिन कितनी कमाई?
सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने बुधवार को 26.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।
पिछले दिन यानी पांचवें दिन फिल्म ने 27 करोड़ कमाए थे।
पहले छह दिनों का कलेक्शन इस प्रकार रहा:
- पहला दिन: 28 करोड़
- दूसरा दिन: 33.10 करोड़
- तीसरा दिन: 44.80 करोड़
- चौथा दिन: 23.25 करोड़
- पांचवां दिन: 27 करोड़
- छठा दिन: 26.5 करोड़
इसके साथ ही भारत में फिल्म का कुल कलेक्शन 179.98 करोड़ रुपये हो गया है। आने वाले वीकेंड में धुरंधर के आसानी से 200 करोड़ क्लब में शामिल होने की पूरी उम्मीद है।
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जवान–पठान पीछे, धुरंधर टॉप 5 में

छठे दिन सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में धुरंधर ने पांचवां स्थान हासिल कर लिया है।
- जवान (6th day): 24 करोड़
- पठान (6th day): 25.5 करोड़
दोनों ही फिल्में धुरंधर से नीचे रह गईं।
फिलहाल धुरंधर से ऊपर पुष्पा 2, गदर 2, छावा और एनिमल जैसी फिल्में हैं।
रणवीर सिंह की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जिस गति से आगे बढ़ रही है, वह इसे इस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल कर सकती है।
“खलनायक नहीं, क्रूरता का चलता-फिरता इतिहास — रणवीर का खिलजी।”
रणवीर सिंह का खिलजी किरदार हिन्दी सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रभावशाली खलनायकों में से एक माना जाता है। फिल्म पद्मावत में उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाई, जो उनकी करियर-परिभाषित परफॉर्मेंस में गिनी जाती है। रणवीर ने इस किरदार को निभाने के लिए न सिर्फ अपनी बॉडी लैंग्वेज और लुक पर कड़ी मेहनत की, बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को इस भूमिका के अंधेरे और क्रूर पक्ष में ढाला।
इस भूमिका के लिए रणवीर ने ऐतिहासिक अध्ययन किया, उस दौर की भाषा, चाल-ढाल, आक्रामकता और सत्ता पिपासा जैसे गुणों को बारीकी से समझा। उन्होंने अपने पूरे व्यक्तित्व को किरदार के अनुरूप ढालने के लिए महीनों तक खुद को अलग-थलग रखा, ताकि वे खिलजी की मानसिकता को महसूस कर सकें। उनकी आवाज़ में भारीपन, आँखों में वहशियत और व्यवहार में अनियंत्रित सत्ता की भूख ने इस भूमिका को और प्रभावशाली बनाया।
फिल्म में रणवीर का प्रदर्शन बेहद तीव्र, उग्र और दमदार था। युद्ध के दृश्यों में उनका जोश और नफरत से भरे संवादों की प्रस्तुति दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। खासकर उनका “किस्मत से कोई शहंशाह बनता है, मैं अपनी किस्मत खुद बनाता हूँ” जैसा संवाद लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
रणवीर ने इस भूमिका को निभाने के बाद स्वीकार किया कि यह किरदार मानसिक रूप से बेहद थकाने वाला था। शूटिंग खत्म होते ही उन्होंने थेरेपी और डिटॉक्स की मदद से खुद को इस किरदार की नकारात्मक ऊर्जा से बाहर निकाला।
कुल मिलाकर, रणवीर सिंह का खिलजी किरदार उनकी अदाकारी की सीमा और तीव्रता का प्रमाण है। यह परफॉर्मेंस उन्हें और भी बड़े कलाकारों की श्रेणी में जगह दिलाता है।





