रिपोर्ट: उपेंद्र कुमावत
Dhar मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल की प्राचीन आदिवासी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक ‘भगोरिया हाट’ पर्व आज से हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है। धार जिले सहित तमाम आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ढोल-मांदल की गूंज सुनाई देने लगी है। इस उत्सव को लेकर जनजातीय समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है, जहाँ अपनी समृद्ध विरासत और लोक कलाओं का अद्भुत प्रदर्शन किया जा रहा है।

कुक्षी में लोक संस्कृति का सैलाब: गैर निकालकर मनाई खुशियाँ
Dhar धार जिले के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कुक्षी में भगोरिया का अलग ही रंग देखने को मिला। यहाँ बड़ी संख्या में आदिवासी समाजजन एकत्रित हुए और पारंपरिक वेशभूषा में ‘गैर’ निकाली। पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल और मांदल की थाप पर युवा और बुजुर्ग जमकर थिरके। मेले में लोकगीतों की गूंज और नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

हाट बाजारों में रौनक: खरीदारी और व्यंजनों का लुत्फ
Dhar भगोरिया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मेल-मिलाप और खरीदारी का बड़ा केंद्र भी है। हाट बाजारों में मेले जैसा दृश्य रहा, जहाँ लोगों ने जमकर खरीदारी की।
- खान-पान का आनंद: चिलचिलाती धूप के बीच युवक-युवतियों और बच्चों ने ठंडी कुल्फी, शरबत और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।
- आकर्षण: मेले में झूला-चकरी और पारंपरिक आभूषणों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई। हर कोई अपनी संस्कृति के इस रंगों भरे त्यौहार के जश्न में डूबा नजर आया।
हफ्ते भर चलेगा उत्सव: 59 स्थानों पर लगेंगे हाट
Dhar धार जिले में इस बार लगभग 59 प्रमुख हाट बाजारों में भगोरिया का आयोजन किया जा रहा है। आज से शुरू हुआ यह सिलसिला अगले एक हफ्ते तक निरंतर चलेगा।
- समापन: इस उत्सव का समापन 2 मार्च को होलिका दहन के पूर्व होगा।
- बढ़ती खुमारी: जैसे-जैसे होली के दिन नजदीक आएंगे, भगोरिया का रंग और भी गाढ़ा होता जाएगा। प्रशासन ने मेले की सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालु और पर्यटक इस लोक उत्सव का सुरक्षित आनंद ले सकें।





