Mohit Jain
भारत की अर्थव्यवस्था ने global दबावों और सुस्त प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के बावजूद जबरदस्त प्रदर्शन किया है। जुलाई–सितंबर 2025 तिमाही में देश की GDP 8.2% की रफ्तार से बढ़ी, जो पिछली 6 तिमाही में सबसे अधिक है। पिछले साल इसी तिमाही में GDP ग्रोथ 5.6% थी, जबकि अप्रैल–जून 2025 में यह 7.8% थी।

ग्रामीण डिमांड और सरकारी खर्च ने दी मजबूती
नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण उपभोग, गवर्नमेंट स्पेंडिंग और फैक्ट्रियों के बढ़ते प्रोडक्शन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भले ही US टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता मौजूद हैं, लेकिन घरेलू डिमांड ने इकोनॉमी को नया बूस्ट दिया है।
GST रेट कट का पूरा असर अभी आना बाकी है, लेकिन इसके बिना भी आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे।
आम आदमी ने खुलकर खर्च किया, GDP को मिला सबसे बड़ा सपोर्ट
देश की GDP का लगभग 60% हिस्सा प्राइवेट कंजम्प्शन से आता है।
नया फोन खरीदना, किराना, बच्चों की फीस, बाइक की EMI-इन्हीं सब खर्चों ने GDP को ताकत दी।
ताजा तिमाही में आम लोगों का खर्च 6.4% से बढ़कर 7.9% हो गया। पिछले साल लोग बचत मोड में थे, लेकिन इस बार कंजम्प्शन इंजन तेजी से चला, जिससे GDP को सीधा फायदा मिला।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई मजबूत रिकवरी
इस तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9.1% दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 2.2% थी।
फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन बढ़ने से रोजगार और सप्लाई चेन गतिविधियों में भी तेजी आई।
RBI से भी बेहतर निकला GDP का नतीजा
1 अक्टूबर को RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% किया था।
लेकिन यह तिमाही इस अनुमान से भी आगे निकल गई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का बड़ा संकेत है।
GDP क्या होती है?
GDP किसी भी देश की आर्थिक सेहत का सबसे बड़ा पैमाना है।
यह बताती है कि देश की सीमाओं के भीतर एक तय अवधि में कितने गुड्स और सर्विसेज का उत्पादन हुआ।
यहां तक कि सीमा के भीतर काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी इसमें शामिल होता है।

GDP दो तरह की होती है–
- रियल GDP: बेस ईयर (2011–12) के दामों पर आधारित
- नॉमिनल GDP: मौजूदा दामों पर आधारित
GDP कैसे निकलती है?
GDP को चार हिस्सों में बांटकर समझा जाता है:
GDP = C + G + I + NX
- C = प्राइवेट कंजम्प्शन
- G = सरकारी खर्च
- I = इन्वेस्टमेंट
- NX = नेट एक्सपोर्ट (एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट)
GDP को बढ़ाने–घटाने वाले चार इंजन
- आम लोगों का खर्च
- बिजनेस सेक्टर की ग्रोथ (GDP में 32% योगदान)
- सरकारी खर्च (GDP में 11% हिस्सा)
- नेट डिमांड (एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट, भारत में आमतौर पर निगेटिव)





