BY
Yoganand Shrivastava
गणतंत्र दिवस पर नई सैन्य झलक, आसमान से ज़मीन तक दमखम
Dehli 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। परेड के दौरान थल, जल और वायु सेना की ताकत ने यह संदेश दिया कि नया भारत सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। राफेल और सुखोई लड़ाकू विमानों की गर्जना के साथ वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने विशेष फॉर्मेशन में उड़ान भरकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने खींचा ध्यान
Dehli परेड में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम, नाग मिसाइल सिस्टम (एमके-2), टी-90 भीष्म टैंक और अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही हाई मोबिलिटी टोही वाहन (एचएमआरवी) जैसी आधुनिक और स्वदेशी सैन्य तकनीकें भी सामने आईं, जो निगरानी, संचार और ड्रोन-रोधी क्षमताओं से लैस हैं। इन प्रणालियों ने भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को स्पष्ट रूप से दर्शाया।

भविष्य की युद्ध तकनीक की झलक
Dehli इस वर्ष परेड में उन्नत और भविष्य की सैन्य तकनीकों को भी प्रदर्शित किया गया। डीआरडीओ द्वारा विकसित लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (एलआर-एएसएचएम), सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और आधुनिक ड्रोन तकनीकों ने भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता को रेखांकित किया। इन हथियार प्रणालियों के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।





