हैदराबाद: तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री को 1 जून से बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सिनेमाघरों के मालिकों ने सभी स्क्रीन बंद करने की चेतावनी दी है। यह निर्णय मौजूदा किराया-आधारित राजस्व मॉडल को लेकर लंबे समय से चल रही नाराजगी के चलते लिया गया है।
प्रतिशत-आधारित मॉडल की मांग
रविवार को आयोजित प्रदर्शक संघ की पहली संयुक्त बैठक में करीब 60 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। इन प्रदर्शकों ने मौजूदा मॉडल की जगह प्रतिशत-आधारित राजस्व प्रणाली की मांग की है, जिसमें वे फिल्म के मुनाफे में अपना निश्चित हिस्सा चाहते हैं। बैठक में यह तय हुआ कि वे इस बदलाव के समर्थन में औपचारिक प्रस्ताव और बंद नोटिस जारी करेंगे।
प्रमुख फिल्म निर्माताओं की अनुपस्थिति
हालांकि इस बैठक में दिल राजू और सुरेश बाबू जैसे प्रमुख नाम शामिल थे, कई बड़े वितरक और निर्माता इसमें शामिल नहीं हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रस्तावित बंदी और मॉडल में बदलाव को लेकर अभी भी इंडस्ट्री में एक राय नहीं है।
बड़े बजट की फिल्मों पर असर संभव
अगर 1 जून से शटडाउन शुरू होता है, तो इससे कई फिल्मों की रिलीज प्रभावित हो सकती है। खासकर कमल हासन की ‘ठग लाइफ’ और पवन कल्याण की ‘हरि हर वीरा मल्लू’, जो जून के पहले और दूसरे सप्ताह में रिलीज़ हो रही हैं, को सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में रिलीज़ करने में बाधाएं आ सकती हैं। केवल मल्टीप्लेक्स थिएटर ही काम करना जारी रख सकते हैं, बशर्ते वे प्रदर्शक संघ के अधीन न हों।
ओटीटी रिलीज को लेकर चिंता
प्रदर्शकों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्मों के जल्दी रिलीज होने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि जब कोई फिल्म थिएटर में सफल हो रही होती है, तो उसका जल्दी डिजिटल रिलीज़ करना थिएटर व्यवसाय के लिए नुकसानदायक होता है। उन्होंने मांग की है कि सफल फिल्मों की ओटीटी रिलीज में देरी की जाए ताकि सिनेमाघरों को पर्याप्त व्यावसायिक लाभ मिल सके।
अगली चर्चा की उम्मीद
प्रदर्शकों का कहना है कि वे इस मुद्दे को लेकर जल्द ही फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स को औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे। इसके साथ ही, 1 जून से पहले इस गतिरोध को सुलझाने के लिए और बैठकें आयोजित होने की संभावना है।
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