रिपोर्ट: पवन कुमार सिंह
Chhapra सारण जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कोठिया गांव के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बीती रात करीब 8:00 बजे घर लौट रहे 40 वर्षीय अमित कुमार की बुलेट अनियंत्रित होकर एक पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि अमित गंभीर रूप से घायल हो गए। विडंबना यह रही कि दुर्घटना स्थल आईटीबीपी (ITBP) कैंप के समीप होने के बावजूद, समय पर मदद न मिलने के कारण घायल युवक ने सड़क किनारे तड़पते हुए दम तोड़ दिया।
दर्दनाक हादसा: घंटों सड़क किनारे पड़ा रहा घायल अमित
Chhapra मृतक अमित, कोठिया गांव निवासी विक्रमा सिंह के पुत्र थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दुर्घटना के बाद अमित काफी देर तक लहूलुहान अवस्था में सड़क किनारे पड़े रहे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बुलेट के परखच्चे उड़ गए थे। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि मुख्य मार्ग होने के बावजूद किसी ने भी मानवता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुँचाने की जहमत नहीं उठाई।
व्यवस्था पर सवाल: आईटीबीपी कैंप के पास भी नहीं मिली मदद
Chhapra ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि यदि कोठिया स्थित आईटीबीपी कैंप के जवानों ने सक्रियता दिखाते हुए घायल को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया होता, तो शायद अमित की जान बचाई जा सकती थी। लोगों ने पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं कि जिस सड़क पर अक्सर गश्ती वाहन देखे जाते हैं, वहाँ घंटों तक एक घायल युवक पड़ा रहा और किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी।
प्रशासन से त्वरित चिकित्सा और सुरक्षा की मांग
Chhapra घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस हादसे के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि “गोल्डन आवर” (हादसे के ठीक बाद का समय) में मदद न मिलना सिस्टम की विफलता है, जिसे भविष्य में रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।





