भोपाल। राजधानी के चार इमली क्षेत्र से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। 20 सितंबर 2025 की शाम लगभग 5 बजे नगर निगम की टीम ने क्षेत्र के करीब 30 हरे-भरे पेड़ों को काट दिया। इनमें 7 चम्पा के पेड़ भी शामिल थे, जो पिछले कई वर्षों से इस इलाके की हरियाली और सुंदरता को संवार रहे थे।

पेड़ कटाई पर विवाद
स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर निगम कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पेड़ों की कटाई की। कर्मचारियों असीम अहमद, श्यामलाल और नीलेश झा का कहना है कि उन्हें आदेश दिया गया था और बगल के एक सरकारी बंगले से “मैडम” ने खड़े होकर पेड़ों को काटने का निर्देश दिया। मौके पर पहुंचे निगम अधिकारी अनवर खान ने कहा कि यह कार्रवाई नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर की गई है और आश्वासन दिया कि कल 12 साल पुराने पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ लगाए जाएंगे।
निवासियों का विरोध
चार इमली के निवासियों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और कहा कि निगम तारों पर गिरे सूखे पेड़ों पर ध्यान नहीं देता, लेकिन स्वस्थ व पुराने पेड़ों को रातों-रात काट देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी बंगले के भीतर एक पचास साल पुराना इमली का पेड़ काटा गया था।
पर्यावरण और नौकरशाही
निवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री नागरिकों से “पर्यावरण बचाओ, पेड़ लगाओ” की अपील कर रहे हैं, तब सरकारी तंत्र खुद क्यों हरियाली को नष्ट कर रहा है। उनका कहना है कि अगर आम नागरिक पेड़ काटे तो अपराध माना जाता है, तो जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग नियम क्यों?
शिकायतें और मांग
इस घटना की शिकायत हबीबगंज थाने के साथ-साथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को भी की गई है। स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
मामला सिर्फ 30 पेड़ों का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो प्रकृति को बाधा समझती है, जीवनदाता नहीं। यदि आज भी हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियों को कंक्रीट का मरुस्थल ही मिलेगा, हरी-भरी धरोहर नहीं। नीतियों और आदेशों के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है, ताकि विकास और पर्यावरण में संतुलन बना रहे।





