रिपोर्ट- संजीव कुमार
बोकारो जिले में डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। आरटीआई से उजागर इस घोटाले ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और जांच की संभावना जताई जा रही है।
ट्रेनिंग और कोचिंग प्रोजेक्ट में गड़बड़ी
सूत्रों के अनुसार, जिला स्तर पर 6 एजेंसियों को 17 कार्यादेश जारी किए गए और इसके बदले 59.82 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ।
- करियर प्लस एजुकेशनल सोसाइटी को 450 छात्रों की कोचिंग के लिए 9.15 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
- प्रति छात्र 1,07,483 रुपए की दर से खर्च दिखाया गया, जो नामी निजी संस्थानों की फीस से भी अधिक है।
- जांच में सामने आया कि संस्थान में पढ़ाई ही बंद है।
- सेंटर हेड ने माना कि 1 सितंबर से क्लासेस बंद हैं, जबकि डायरेक्टर ने भुगतान न मिलने की बात कही।
इसी तरह, युवाओं को ट्रेनिंग देने के नाम पर भी लाखों-करोड़ों रुपए जारी किए गए।
- इंस्ट्रूमेंट, ऑटोमोशन, सर्विलांस एंड कम्युनिकेशन एजेंसी को एक आदेश में 4.97 करोड़ रुपए का टेंडर मिला।
- एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया को 4 आदेशों में 17.33 करोड़ रुपए दिए गए।
- प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को बेरमो क्षेत्र में ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के नाम पर 13.58 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ, लेकिन इलाके के लोगों को इस संस्था की कोई जानकारी नहीं है।
तेनुघाट डैम में मछली पालन का मामला
दूसरे मामले में, गोमिया प्रखंड के तेनुघाट डैम में केज के सहारे मछली पालन और एक्वाकल्चर पार्क विकसित करने के लिए 4.92 करोड़ रुपए का कार्यादेश दिया गया।
- लेकिन काम का मात्र 10% ही पूरा हुआ।
- मछुआरों का कहना है कि तेनुघाट में पहले से ही केज फिशिंग चल रही थी।
- खर्च की गई राशि से पूरे क्षेत्र में बेहतर मत्स्य पालन की व्यवस्था हो सकती थी, लेकिन एजेंसी ने खानापूर्ति भर की।
- अब तक 50 लाख रुपए का भी काम नहीं हुआ, जबकि आधे से ज्यादा पैसे का भुगतान हो चुका है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
जमशेदपुर पश्चिम से जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि बाबूलाल मरांडी का राज्य सरकार से जांच की मांग करना गलत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मरांडी खुद सरकार के मुखिया हैं, ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार से जांच की मांग करनी चाहिए।
सरयू राय ने यह भी सवाल उठाया कि बोकारो में यह घोटाला किसके इशारे पर हुआ। उन्होंने दावा किया कि रामगढ़ और धनबाद समेत अन्य जिलों में बोकारो से भी बड़ा घोटाला हुआ है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि डीएमएफटी की राशि का दुरुपयोग सुनियोजित तरीके से हुआ। मनमानी एजेंसियों को चयनित कर मोटे टेंडर जारी किए गए और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जारी राशि का लाभ न तो छात्रों को मिला और न ही स्थानीय लोगों को।





