युवाओं के लिए अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण की मांग
by: vijay nandan
गुना: बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरी हैं। गुना से विधायक शाक्य ने कहा है कि भारत में नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि 18 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
यह बयान विधायक ने गुना में आयोजित एक राज्य स्तरीय जूडो और बॉक्सिंग प्रतियोगिता के समापन समारोह के दौरान दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “देश के मौजूदा हालात को देखते हुए हमें सतर्क रहने की जरूरत है। पड़ोसी देशों में अस्थिरता के उदाहरण हमारे सामने हैं। गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचने के लिए युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देना जरूरी है।”
शाक्य के इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग उनके बयान को देश की सुरक्षा के लिए चिंता के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई इसे अतिशयोक्तिपूर्ण और विवादास्पद मान रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पन्नालाल शाक्य अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उनके कई बयानों ने विवाद खड़ा किया था। इस ताजा बयान पर अभी तक बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पन्नालाल शाक्य के पहले के विवादित बयान
- छात्रों को पंक्चर की दुकान खोलने की सलाह (जुलाई 2024): गुना पीजी कॉलेज के एक कार्यक्रम में विधायक शाक्य ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा कि अगर डिग्री लेकर नौकरी न मिले तो पंक्चर की दुकान खोल लें। उन्होंने कहा, “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोलने का क्या फायदा अगर छात्र बेरोजगार घूमते रहें? उन्हें पंक्चर की दुकान खोलने जैसी स्किल सिखानी चाहिए।” इस बयान ने शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर सवाल उठाए, और विपक्ष ने इसे अपमानजनक बताते हुए आलोचना की। शाक्य खुद जीवाजी विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री धारक हैं, जिससे बयान और विवादास्पद हो गया।
- अपनी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा (मई 2025): गुना को नगर निगम बनाने की प्रक्रिया के दौरान शाक्य ने अपनी ही भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “प्रशासन हमें गंभीरता से नहीं लेता, सुनवाई उनकी हो रही है जो…” (बयान अधूरा छोड़ते हुए उन्होंने आरक्षित सीट के विधायकों की अनदेखी का आरोप लगाया)। एक पत्र में उन्होंने विकास प्रस्तावों की अनदेखी का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में भाजपा सरकार होने के बावजूद उनके सुझावों को महत्व नहीं दिया जा रहा। इस बयान ने पार्टी के अंदर ही असंतोष पैदा किया और उन्हें सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाला बताया गया।
- केंद्रीय मंत्री सिंधिया के सामने तीखा बयान (जनवरी 2025): गुना लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे के दौरान शाक्य ने कहा, “कोई ये न समझे कि हम मुंह में या जेब में रख लेंगे।” यह बयान विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन के संदर्भ में आया, जहां उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर जोर देते हुए अप्रत्यक्ष रूप से उच्च नेतृत्व की अनदेखी का संकेत दिया। इसने पार्टी के अंदर तनाव बढ़ाया, हालांकि सिंधिया ने इसे नजरअंदाज किया।
ये बयान शाक्य के राजनीतिक करियर में बार-बार चर्चा का विषय बने हैं, जो उनकी सीधी बोलचाल शैली को दर्शाते हैं। विपक्ष अक्सर इन्हें पार्टी लाइन से हटकर बताता है, जबकि समर्थक इन्हें जमीनी मुद्दों पर साहसी रुख मानते हैं। वर्तमान में भाजपा नेतृत्व ने इन पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।





