रायपुर, 30 मार्च 2025 – छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बड़ी सफलता मिली है, जहां 50 माओवादियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से ठीक पहले आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 14 माओवादी ऐसे थे, जिन पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम था।
माओवादियों ने क्यों किया आत्मसमर्पण?
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस और सीआरपीएफ के सामने हथियार डालते हुए बताया कि वे:
- माओवादी विचारधारा से मोहभंग हो चुके हैं।
- संगठन के भीतर झगड़े और भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं।
- आदिवासियों का शोषण करने वाले वरिष्ठ माओवादी नेताओं से नाराज़ थे।

सरकार की “निया नेल्लानार” (आपका अच्छा गांव) योजना, जो दूरदराज के इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचा रही है, ने भी उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी
- 6 माओवादियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।
- 3 माओवादियों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था।
- 5 माओवादियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था।
किसने कराया आत्मसमर्पण?
इस ऑपरेशन में शामिल थे:
- डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG)
- बस्तर फाइटर्स
- स्पेशल टास्क फोर्स (STF)
- सीआरपीएफ और कोबरा यूनिट
सरकारी नीति के तहत इन माओवादियों का पुनर्वास किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में हाल की कार्रवाइयाँ
- सुकमा और बीजापुर में 18 नक्सलियों का एनकाउंटर (29 मार्च)
- 2025 में अब तक 134 माओवादी ढेर (118 सिर्फ बस्तर में)
- 2024 में बस्तर में 792 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया
यह आत्मसमर्पण PM मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले हुआ है, जहां वे 33,700 करोड़ रुपये की योजनाओं का शुभारंभ करेंगे। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करना है।
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