अंतर्राष्टीय वन मेले में 300 से अधिक प्रकार की जड़ी बूटियों की औषधियां
भोपाल: राजधानी में इनदिनों भारत की सनातन इलाज की पद्धति आर्युवेद औषधियों का मेला लगा है। वन विभाग की सबसे अमीर ब्रांच राज्य लघु वन उपज संघ द्वारा 17 दिसंबर से अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का आयोजन किया गया है। जो 23 दिसंबर 2023 तक चलेगा। यहां हर साल की तरह पूरे प्रदेश की जिला इकाइयों द्वारा इकट्टा की गई, जड़ी बूटियों के करीब 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। मेले में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पहाड़ी राज्यों के स्टॉल भी लगे हैं। दावा किया जाता है कि इस मेले में एलोपैथिक से लाइलाज बीमारियों का जड़ी बूटियों से संपूर्ण उपचार करने की औषधियां उपलब्ध हैं। राज्य लघुवनो उपज संघ की जिला इकाइयों के ज्यादातर स्टॉल्स पर निःशुल्क नाड़ी देखने वाले वैद्यराज मौजूद हैं, जो अलग-अलग बीमारी के अनुसार औषधियां भी देते हैं । मुख्यतौर पर मेले में….
इन रोगों के उपचार की औषधियां उपलब्ध हैं
- मोटापा, शुगर, पेट के रोग
- जोड़ों के दर्द, गठिया, सरयटिका
- चोट मोच, पथरी, दमा और खांसी
- कुकर खांसी, चेहरे के खील मुहांसे
- काले दाग धब्बे, तिल, झाइयां, मस्से
- चर्म रोग, गुप्त रोग, महिला के रोग
- महिलाओं को लाल पानी, सफेद पानी
- लिकोरिया, कमर दर्द
- पुरुषों के लिए शक्तिवर्धक प्रास
- शीर्घपतन, स्वप्नदोष

जैसे सनातन संस्कृति में मानव के साथ-साथ सभी जीवों के उपचार के लिए अथर्ववेद रचा गया है। कहा जाता है कि अर्थवेद ही आयुर्वेद है, जिसे ऋषि मुनियों कई वर्षों की तपस्या के बाद मानवता और जीवों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। उदाहरण के तौर पर सर्दी के मौसम में एक खास विधि से ‘घी धोकर’ एक ऐसी क्रीम तैयार की जाती है, जो त्वचा की आखिरी परत तक पहुंचकर कोशिकाओं को पोषण देने के साथ-साथ त्वचा में निखार भी लाती है। बुखार ताव, खांसी, पेट की बीमारी से लेकर कैंसर तक की आयुर्वेद पद्धति में औषधियां मौजूद हैं।
मेले में आयुर्वेदिक सौन्दर्य क्रीम-पाउडर भी उपलब्ध
- घृत कल्प मॉइसचराइजर
- सर्जरस मलहर
- भृंगराज तेल, जगनी तेल
- अलसी तेल, तिल तेल
- सन बर्न क्रीम


वन मेले में तरह-तरह की आयुर्वेदिक औषधियों के साथ ही (मोटा अनाज) मिलेट्स के प्रोडक्ट के नवाचार भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सीहोर जिला (रेहटी) इकाई के स्टॉल ज्वार का पोहा, रागी का पोहा, समा पोहा, कुटकी का पोहा, हर्बल चाय भी उपलब्ध है। इसके साथ ही बांस के फर्नीचर भी मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।



100 रु. से लेकर 12000 रु तोला तक जड़ी बूटी के दाम
मेले में खास बात यह रही कि इस बार देशभर के अलग-अलग क्षेत्रों से वैद्य आए। इसके साथ ही मेले में कुछ दुर्लभ जड़ी बूटियां भी देखने को मिली। जिसमें प्रमुख रूप से लाजवंती जड़ी है, यह जड़ी बूटी हड्डियों की ताकत के लिए कारगार है, इसके साथ ही कामराज और जागड़ा जैसी दुर्लभ जड़ी बूटी भी मेले में उपलब्ध है। बता दें कि जागड़ा जड़ी बूटी 6 हजार रूपए किलो मिलती है, जो कि हड्डियों के रोग के लिए रामबाण है। इसके साथ ही ताकत बढ़ाने के लिए किष्कर नाम की जड़ी भी मेले में उपलब्ध है जो कि 12 हजार रूपए प्रति तोला है।


मेले में आए देश भर के प्रसिद्ध बैद्य
वनमेला में देश भर से बैद्य आए, जो कि बीमारियों का देशी इलाज करते है। पातालकोट छिन्दवाड़ा के गुलशन वैद्य मोटापा, शुगर, दमा खांसी, चर्म रोग, गुप्त रोग, बालों के रोग जैसी बीमारियों का इलाज देशी जड़ी बूटियों से करते है। वहीं कानपुर से आनन्देश्वर ग्रामोद्योग सेवा समिति द्वारा स्टॉल लगाया गया है, जो कि जोड़ों का दर्द, शीघ्र पतन, चोट, सूजन जैसी बीमारियों का इलाज देशी जड़ी बूटियों के माध्यम से करते है। इनके पास खास प्रकार के चूर्ण भी उपलब्ध है, जिसमें प्रमुख रूप से त्रिफला चूर्ण है।





