Bhopal: शनिवार को राजधानी भोपाल की केंद्रीय जेल में न्यायिक सक्रियता और मानवीय दृष्टिकोण की एक नई तस्वीर देखने को मिली। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने जेल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया और बंदियों के लिए आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कैदियों की समस्याओं को सुना और उन्हें मिलने वाली कानूनी सुविधाओं की समीक्षा की।
निशुल्क विधिक सहायता और अधिकारों पर चर्चा
Bhopal जागरूकता शिविर के दौरान न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव ने बंदियों को उनके मौलिक कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम और यूटीआरसी (UTRC) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि आर्थिक रूप से अक्षम बंदी किस प्रकार सरकारी खर्च पर वकील प्राप्त कर सकते हैं। न्यायाधीश ने उन बंदियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए जिनके पास पैरवी के लिए वकील नहीं हैं या जिन्हें जमानत आवेदन और अपील दायर करने में कठिनाई आ रही है।
जेल प्रबंधन और महिला वार्ड का निरीक्षण
Bhopal निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने जेल की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने बंदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा व्यवस्था और परिसर की साफ-सफाई पर संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही, जेल में बंदियों को दिए जा रहे रोजगार के अवसरों और सुरक्षा इंतजामों की भी जानकारी ली गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जेल के भीतर का वातावरण सुधारात्मक होना चाहिए।
महिला बंदियों और बच्चों के भविष्य पर विशेष ध्यान
Bhopal न्यायाधीश ने महिला वार्ड का दौरा कर वहां निरुद्ध महिला कैदियों और उनके साथ रह रहे छोटे बच्चों की स्थिति को देखा। उन्होंने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और उनके पोषण व स्वास्थ्य के संबंध में जेल प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश दिए। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जेल में रहने के बावजूद बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।





