वन्य जीवन और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
बलरामपुर, 7 अप्रैल:
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले स्थित सेमरसोत अभ्यारण्य में आग ने विकराल रूप ले लिया है। जंगल के चारों दिशाओं में फैली आग के चलते पूरा क्षेत्र धुएं की चपेट में आ गया है। इससे न सिर्फ वन्य जीवों का जीवन संकट में आ गया है, बल्कि दुर्लभ वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
NH-343 पर छाया धुएं का अंधकार
आग का असर अब जंगलों से निकलकर आमजन के जीवन को भी प्रभावित करने लगा है। नेशनल हाईवे-343 पर धुएं के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।
महुआ बीनने के लिए लगाई जा रही आग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ अज्ञात ग्रामीण महुआ के फूल इकट्ठा करने के उद्देश्य से जानबूझकर जंगलों में आग लगा रहे हैं, ताकि झाड़ियों को हटाकर महुआ आसानी से बीन सकें। यह परंपरा हर साल गर्मी के मौसम में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार आग ने बड़ा रूप ले लिया है।
वन विभाग की कार्रवाई नाकाफी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग आग बुझाने और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। न तो पर्याप्त संसाधन लगाए गए हैं और न ही दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई है। इससे जंगलों में आग की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
जनता की मांग – तुरंत राहत और सख्त कार्रवाई
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने, आग बुझाने के लिए विशेष टीम तैनात करने और आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।





