नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की उपासना का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यता के अनुसार देवी कात्यायनी का स्वरूप सुनहरे तेज से भरपूर है। उनकी पूजा से साधक को सुख, सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि में विधिपूर्वक मां कात्यायनी की पूजा, जप और व्रत करता है, तो देवी उसकी सभी समस्याओं और भय को दूर कर उसे आशीर्वाद देती हैं।
मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी, देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। उनका रूप अत्यंत दिव्य और सुनहरी आभा लिए हुआ है। चार भुजाओं वाली माता के हाथों में तलवार, कमल का फूल, वरमुद्रा और अभयमुद्रा होती है। वे सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
पूजा विधि
मां कात्यायनी की पूजा के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान और ध्यान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल के ईशान कोण में लाल कपड़ा बिछाकर उस पर माता का चित्र या मूर्ति रखें। पवित्र जल का छिड़काव करें और पीले फूल व वस्त्र अर्पित करें।
देवी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल, रोली-अक्षत और पीली मिठाई अर्पित करें। मंत्र का उच्चारण करते हुए जप करना चाहिए। प्रमुख मंत्र है:
मंत्र:
“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”
पूजा के अंत में सभी को प्रसाद बांटें और माता की कृपा प्राप्त करें।
भोग और महाउपाय
नवरात्रि के छठवें दिन मां को पीले फल या पीली मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति के विवाह में बाधा हो रही हो, तो खड़ी हल्दी और पीले फूल अर्पित करके पूजा करना विशेष लाभदायक है।
मां कात्यायनी की पूजा जीवन के हर संकट को दूर करती है और इच्छित वर की प्राप्ति में सहायता करती है।
मां कात्यायनी की कथा

मां कात्यायनी का जन्म महार्षि कात्यायन के आश्रम में हुआ था। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर और अन्य राक्षसों के अत्याचार के समय देवी ने त्रिदेवों के तेज से उत्पन्न होकर राक्षसों का नाश किया और देवताओं को संकट से मुक्ति दिलाई। उनके जन्म और तपस्या की कथा नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से पढ़ी जाती है।
मां कात्यायनी की आरती

मां कात्यायनी की आरती करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के छठवें दिन इस आरती का विशेष महत्व है। आरती इस प्रकार है:
आरती पाठ:
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जग माता, जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा, वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम हैं, कई धाम हैं, यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में ज्योति तुम्हारी, कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
कात्यायनी रक्षक काया की, ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुड़ाने वाली, अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए, ध्यान कात्यायनी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी, भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी मां को भक्त पुकारे, कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥
आरती के दौरान भक्तों को विशेष भक्ति भाव के साथ माता का ध्यान करना चाहिए और अंत में प्रसाद ग्रहण करें।





