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नेपाल ने दिखाई सख्ती: “हमारी ज़मीन से नहीं होगा भारत के खिलाफ आतंकी पारगमन”, लश्कर और जैश पर कसेगा शिकंजा

BY: Yoganand Shrivastva

काठमांडू | कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने न केवल भारत को झकझोर कर रख दिया, बल्कि इसके साए नेपाल की धरती तक भी पहुँच गए। अब नेपाल ने स्पष्ट शब्दों में ऐलान किया है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी सूरत में भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होने देगा। खास तौर पर पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को लेकर नेपाल में चिंता गहराई है।

पहलगाम हमला: नेपाल ने बताया साल का सबसे भयावह आतंकी वारदात

नेपाल के पूर्व विदेश सचिव दिनेश भट्टाराई ने इस घटना को “हाल के वर्षों का सबसे खतरनाक आतंकी हमला” करार देते हुए कहा कि इस वारदात में आतंकियों ने पहचान के बाद लोगों को सिर में गोली मार दी। यह अमानवीयता न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

नेपाल के नेताओं की चेतावनी: लश्कर और जैश के लिए नहीं बनेगा पारगमन मार्ग

नेपाल में आयोजित एक उच्च स्तरीय संगोष्ठी — “दक्षिण एशिया में आतंकवाद: क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए चुनौतियां” — में कई पूर्व मंत्रियों, सैन्य अधिकारियों और विदेश नीति विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

इस संगोष्ठी में पूर्व उद्योग मंत्री सुनील बहादुर थापा ने कहा:

“भारत के खिलाफ पाकिस्तान के आतंकी संगठनों द्वारा नेपाल की धरती को पारगमन के रूप में इस्तेमाल करना न केवल भारत बल्कि नेपाल की संप्रभुता के लिए भी खतरा है। हमें इसमें सख्ती दिखानी होगी।”

धन शोधन को बताया गया आतंकवाद की रीढ़

नेपाल की पूर्व मंत्री चंदा चौधरी ने मनी लॉन्ड्रिंग को आतंकवाद का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि सीमापार आतंकवाद को रोकने के लिए फाइनेंशियल नेटवर्क को तोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि:

“आतंकी संगठन नेपाल की वित्तीय प्रणाली में सेंध लगाकर न केवल नेटवर्क बना रहे हैं, बल्कि भारत के खिलाफ साजिशों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।”

सीमा सुरक्षा और खुफिया साझेदारी पर नेपाल की सहमति

पूर्व विदेश सचिव मधु रमन आचार्य ने भारत और नेपाल के बीच सीमा पर संयुक्त पेट्रोलिंग और इंटेलिजेंस शेयरिंग की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश मिलकर कार्य करें, तो आतंकी नेटवर्क को सीमा पर ही रोका जा सकता है।

उनके मुताबिक:

“नेपाल की ज़मीन आतंकवाद के लिए इस्तेमाल हो, यह हम नहीं चाहते। भारत के साथ मिलकर हम इस खतरे से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।”

🪖 सेना भी साथ: आतंकवाद पर दोहरे मापदंड न अपनाएं – पूर्व मेजर जनरल पूर्ण सिलवाल

नेपाल सेना के पूर्व मेजर जनरल पूर्ण सिलवाल ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चेताया कि आतंकवाद पर अगर ‘पसंद-नापसंद’ की नीति अपनाई गई तो इसका फायदा आतंकी संगठनों को मिलेगा। उन्होंने सख्त भाषा में कहा:

“हमें एक जैसी नीति अपनानी होगी। आतंकवाद के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, चाहे वह किसी भी दिशा से आ रहा हो।”

क्षेत्रीय सहयोग को बताया गया जरूरी

सम्मेलन में शामिल सभी नेताओं और विशेषज्ञों ने माना कि आतंकवाद एक सीमा नहीं देखता। इस पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब दक्षिण एशिया के देश मिलकर कदम उठाएं। भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका को एक साझा रणनीति बनानी होगी ताकि आतंक की जड़ें समय रहते काटी जा सकें।

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