भोपाल नवाब की 15,000 करोड़ की संपत्ति पर चल रहे कानूनी विवाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के साल 2000 में दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है और मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया है। यह फैसला बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान और उनकी मां शर्मिला टैगोर सहित कई अन्य परिजनों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सुनाया गया फैसला
हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश का हवाला देते हुए यह निर्णय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि:
- ट्रायल कोर्ट को इस मामले की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करनी होगी।
- पक्षकारों को फिर से सबूत पेश करने की अनुमति दी जाएगी।
- ट्रायल कोर्ट को बदली हुई कानूनी स्थिति के अनुसार मामला सुनना होगा।
विवाद की जड़: भोपाल नवाब की पुश्तैनी संपत्ति
यह विवाद भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की निजी संपत्ति से जुड़ा है। नवाब की मृत्यु के बाद संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर परिवार में विवाद पैदा हुआ।
अपीलकर्ताओं का दावा:
- 1949 में भोपाल रियासत का भारत में विलय एक लिखित समझौते के तहत हुआ था।
- समझौते में नवाब के विशेष अधिकार और निजी संपत्ति पर उनका स्वामित्व सुरक्षित रखा गया।
- संपत्ति का उत्तराधिकार भोपाल सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम 1947 के अंतर्गत होगा।
साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किए जाने के बाद बढ़ा विवाद
नवाब की मृत्यु के बाद उनकी बेटी साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किया गया। भारत सरकार ने 10 जनवरी 1962 को एक पत्र जारी किया जिसमें संपत्ति को ‘निजी संपत्ति’ घोषित किया गया।
अपीलकर्ताओं की आपत्ति:
- उन्होंने भारत सरकार के इस फैसले को गलत बताया।
- उनका कहना था कि नवाब की निजी संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होना चाहिए था।
पहले क्यों खारिज हुई थी अपील?
ट्रायल कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए एक पुराने फैसले—AIR 1997 मिस तलत फातिमा हसन बनाम नवाब सैयद मुर्तजा अली खान—पर भरोसा जताया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा:
- यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 में खारिज कर दिया गया था।
- ट्रायल कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज कर दिया था।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को CPC के आदेश 14, नियम 23A के तहत दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है। इसका मतलब यह है कि:
- मामला फिर से ट्रायल कोर्ट में जाएगा।
- सभी पक्षकार सबूत और दस्तावेज दोबारा पेश कर सकेंगे।
- ट्रायल कोर्ट को पूरे मामले की समीक्षा कर फिर से निर्णय देना होगा।
भोपाल नवाब की पुश्तैनी संपत्ति का यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और कानूनी मिसाल भी बनता जा रहा है। हाईकोर्ट का यह फैसला अब इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद को एक नई दिशा देगा। साथ ही, इससे सैफ अली खान समेत नवाब खानदान के कई सदस्यों की उम्मीदों को झटका लगा है।





