अमरीश पुरी: बॉलीवुड के सबसे खौफनाक विलेन की कहानी, जो अंधे किरदार से शुरू हुई और ‘मोगैम्बो’ तक पहुंची

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जब भी हिंदी सिनेमा के सबसे डरावने विलेन की बात होती है, तो एक ही नाम सबसे पहले दिमाग में आता है—अमरीश पुरी। ‘मोगैम्बो खुश हुआ’ जैसे संवाद आज भी उनकी गूंज छोड़ते हैं। आज, 22 जून 2025 को, इस महान अभिनेता की 93वीं जयंती पर आइए जानते हैं उनके संघर्ष, स्टारडम और फिल्मों से जुड़ी कुछ अनसुनी कहानियां।

अभिनय की शुरुआत: मराठी सिनेमा से

  • अमरीश पुरी का फिल्मी सफर आसान नहीं था।
  • 1967 में उन्होंने मराठी फिल्म ‘शंततु! कोर्ट चालू आहे’ से शुरुआत की।
  • इस फिल्म में उन्होंने एक अंधे गायक का रोल निभाया, जो ट्रेन में गाने गाता है।
  • खास बात ये है कि उन्होंने 39 साल की उम्र में अपना एक्टिंग डेब्यू किया।

परिवार से मिला न समर्थन, फिर भी नहीं मानी हार

  • अमरीश पुरी हीरो बनना चाहते थे, लेकिन बार-बार रिजेक्शन ने उन्हें झकझोर दिया।
  • अपने भाई से फिल्मों में काम मांगा, तो उन्होंने कह दिया कि ‘तुम्हारा चेहरा हीरो जैसा नहीं है’
  • मजबूरी में एक इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी की।
  • लेकिन अभिनय का सपना छोड़ा नहीं—और वही चेहरा आगे चलकर बना सबसे महंगा विलेन।

सिर्फ हिंदी ही नहीं, हॉलीवुड में भी छोड़ी छाप

  • अमरीश पुरी ने मराठी, हिंदी, पंजाबी से लेकर हॉलीवुड तक में काम किया।
  • स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘Indiana Jones and the Temple of Doom’ में उन्होंने मूला राम का किरदार निभाया।
  • खुद स्पीलबर्ग ने कहा था कि अमरीश पुरी उनके सबसे पसंदीदा विलेन एक्टर्स में से हैं।

‘मोगैम्बो’ का किरदार: जो लिखा गया इतिहास में

  • 1987 में आई ‘मिस्टर इंडिया’ में मोगैम्बो का रोल उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना।
  • शुरुआत में यह रोल अनुपम खेर को दिया गया था, लेकिन बाद में निर्देशक शेखर कपूर ने अमरीश पुरी को चुना।
  • जब रोल ऑफर हुआ, तब तक फिल्म की 60% शूटिंग हो चुकी थी।
  • अमरीश पुरी ने अपनी आत्मकथा ‘Act of Life’ में लिखा, “मैं आशंकित था, लगा कि अब जाकर उन्हें मेरी याद आई है। लेकिन ये किरदार मेरी किस्मत बदलने वाला साबित हुआ।”

विरासत: जो आज भी अमर है

  • 2005 में इस दुनिया से विदा लेने के बाद भी, अमरीश पुरी की मौजूदगी उनके डायलॉग्स, किरदारों और फिल्मों के ज़रिए आज भी ज़िंदा है।
  • उन्होंने साबित कर दिया कि एक मजबूत आवाज, दमदार अभिनय और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी शून्य से शिखर तक पहुंच सकता है।

अमरीश पुरी सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक भावना थे।
उनकी जर्नी इस बात की मिसाल है कि उम्र, अस्वीकृति या परिस्थितियां आपको रोक नहीं सकतीं—अगर आपके अंदर जुनून हो।

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