रिपोर्ट – प्रशांत जोशी
कांकेर — कांकेर जिले के राजापारा में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रारंभ हुए राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। यह मंदिर जनसहयोग से बनाया जा रहा था और इसका स्वरूप अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज़ पर तय किया गया था। लेकिन बीते तीन वर्षों से यह निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।
राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि मंदिर का निर्माण कार्य पहले तेजी से चल रहा था। लेकिन जब नींव की खुदाई की गई, तब जमीन से रेत निकल आया। इस तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए मजबूरी में बेसमेंट (नींव का मजबूत आधार) बनाया गया, जिसमें अधिकांश निधि खर्च हो गई। इसके बाद निर्माण कार्य रोकना पड़ा क्योंकि आगे की लागत के लिए पर्याप्त धन नहीं बचा।
अब समिति फिर से बैठक कर रही है और जनसहयोग के माध्यम से मंदिर निर्माण कार्य को दोबारा प्रारंभ करने की योजना बनाई जा रही है। समिति का कहना है कि जैसे ही सहयोग प्राप्त होगा, कार्य को फिर से गति दी जाएगी।
इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक समय में कांकेर क्षेत्र में बेहद उत्साह का माहौल था। लोगों ने उत्सव के रूप में भूमि पूजन में भाग लिया था और राम भक्तों में भारी उमंग देखी गई थी। अब जबकि निर्माण अधूरा पड़ा है, लोग यह जानना चाहते हैं कि श्रीराम मंदिर आखिर कब बनकर तैयार होगा।
जनता की भावना और श्रद्धा को देखते हुए मंदिर निर्माण कार्य का पुनः प्रारंभ होना अब समय की मांग बन चुका है। समिति को उम्मीद है कि जनसहयोग और स्थानीय प्रशासन की मदद से यह कार्य शीघ्र ही फिर से शुरू होगा और कांकेर का यह श्रीराम मंदिर अपने पूर्ण स्वरूप में भक्तों के सामने आएगा।





