27 मई 2025 को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की गिरावट के साथ 85.15 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले बंद मूल्य 85.09 था। रुपये की यह कमजोरी मुख्य रूप से तेल आयातकों की डॉलर मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण आई है।
रुपये कमजोर क्यों हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार रुपये के कमजोर खुलने के प्रमुख कारण हैं:
- तेल कंपनियों के लिए राज्य-स्वामित्व वाली बैंकों द्वारा डॉलर की बढ़ी हुई मांग
- अमेरिका की व्यापार और वित्तीय नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जो भारत के तेल आयात पर प्रभाव डालते हैं
कच्चे तेल की कीमतें और मुद्रा बाजार पर प्रभाव
27 मई को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 64.58 डॉलर प्रति बैरल पर थीं, जो पिछले दिन से 16 सेंट (0.25%) कम थीं। यह गिरावट इस उम्मीद से आई है कि OPEC+ समूह आगामी बैठक में उत्पादन बढ़ा सकता है।
तेल की कीमतों में कमी से भारत के आयात खर्च में कमी आ सकती है, जिससे रुपये पर डॉलर की मांग प्रभावित होती है।
डॉलर इंडेक्स और रुपये पर इसका असर
डॉलर इंडेक्स (DXY), जो अमेरिकी डॉलर की प्रमुख छह मुद्राओं के मुकाबले ताकत को मापता है, सुबह के सत्र में 98.866 पर था, जो पिछले सत्र के 98.93 से थोड़ा कम है। हालांकि, डॉलर की मजबूती अभी भी उभरती बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डाल रही है, जिसमें रुपये भी शामिल है।
रुपये का प्रदर्शन : 26 मई 2025 का रिव्यू
पिछले कारोबारी दिन रुपये ने दोपहर में थोड़ी मजबूती दिखाई और 84 के स्तर के नीचे गया, लेकिन तेल आयातकों के लिए डॉलर की बढ़ी मांग के कारण वह तेजी जल्दी खत्म हो गई।
यह दर्शाता है कि रुपये का बाजार में उतार-चढ़ाव बाहरी आर्थिक प्रभावों और घरेलू डॉलर मांग पर निर्भर है।
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ट्रेडर्स और आयातकों के लिए सुझाव
- आयातकों को कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी नीतियों पर नजर रखनी चाहिए।
- फॉरेक्स ट्रेडर्स रुपये में ऊपर की ओर रुख देख सकते हैं, लेकिन अचानक डॉलर की मांग के लिए सतर्क रहें।
- निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दें जो डॉलर और तेल की कीमतों को प्रभावित करते हैं।





