रिपोर्टरः सर्वेश सिंह, अपडेटः योगानंद श्रीवास्तव
कानपुर: झोलाछाप और अप्रशिक्षित डॉक्टर यू.एस. सिंह के खिलाफ कई बार शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ स्वयं डॉक्टर यू.एस. सिंह को बीजेपी का सक्रिय कार्यकर्ता बताकर कार्यवाही से बचते नजर आए। जब पत्रकारों ने इस विषय पर सवाल उठाया, तो उन्होंने उल्टा यही पूछ लिया—”अब ऐसे में मैं क्या करूं?”
इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी और रवैया न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि आम जनता की जान के साथ भी खिलवाड़ है। यदि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों को खुली छूट मिलती रही, तो यह भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे सकती है।
स्वास्थ्य विभाग, खासकर कानपुर सीएमओ कार्यालय की यह उदासीनता एक गंभीर चिंता का विषय है। सवाल ये उठता है—अगर गलत इलाज के कारण किसी मरीज की जान जाती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन तब भी अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लेगा?
स्वदेश न्यूज़ ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया और झोलाछाप डॉक्टर यू.एस. सिंह के क्लिनिक की वास्तविकता जनता के सामने रखी। इसके बावजूद, संबंधित विभाग के अधिकारी कार्रवाई के बजाय टाल-मटोल में लगे हुए हैं।
अब समय आ गया है जब प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और ऐसे अनधिकृत चिकित्सकों पर सख्त कदम उठाने चाहिए, जो मानव जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक राजनीति के नाम पर इस तरह के लोगों को बचाया जाता रहेगा?
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