बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इस बार दिनाजपुर के बिराल उपजिला में हिंदू समुदाय के एक प्रमुख नेता भावेश चंद्र को अगवा करके बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया। पुलिस और परिवार वालों ने इसकी पुष्टि की है।
भावेश चंद्र बिराल इकाई के बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के उपाध्यक्ष भी थे। उनकी पत्नी शांतना रॉय ने बताया कि गुरुवार को चार लोग दो मोटरसाइकिलों पर आए और उन्हें घर से उठाकर ले गए। गवाहों ने बताया कि उन्हें नराबाड़ी गांव ले जाकर जमकर पीटा गया। बाद में, बेहोश अवस्था में उन्हें वापस घर छोड़ दिया गया। अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में हिंदुओं, अहमदियों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। धरमपुर, नारायणगंज, चटगांव समेत कई इलाकों में मंदिरों, घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया है।
- ढाका के मानवाधिकार संगठन ‘आईन ओ सालिश केन्द्र’ (ASK) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में हिंदुओं के 147 मंदिरों और घरों पर हमले हुए हैं।
- 408 घरों को तोड़ा गया, 36 मामलों में आगजनी की गई।
- 113 दुकानें लूटी गईं, 92 मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ा गया।
भारत की चिंता
भारत ने बार-बार बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बैंकॉक में BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद युनूस से इस मुद्दे पर बातचीत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने अपनी चिंता जताई है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।”
क्या है पूरा मामला?
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में अवामी लीग की सरकार के बाद युनूस सरकार आई, और तब से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कई इलाकों में हिंदुओं को धमकाया जा रहा है, उनकी संपत्ति जब्त की जा रही है, और महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले भी बढ़े हैं।
क्या होगा आगे?
पुलिस ने भावेश चंद्र की हत्या के मामले में केस दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश जारी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ केस दर्ज करने से हिंसा रुकेगी? बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, नहीं तो यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।





