केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और बम निरोधक दल (बीडीएस) ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा लगाए गए 45 किलोग्राम के शक्तिशाली इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। यह उपकरण चेरपाल-पलना सड़क पर मिला था, जिसे शुक्रवार सुबह निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे एक बड़े हादसे को टाला गया।
सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह सीआरपीएफ की 222वीं बटालियन की एक टीम पलानार कैंप से क्षेत्रीय नियंत्रण अभियान के लिए निकली थी। वापसी के दौरान सुबह 8:00 से 8:30 बजे के बीच उन्हें चेरपाल से लगभग दो किलोमीटर दूर चेरपाल-पलानार सड़क पर माओवादियों द्वारा लगाया गया आईईडी मिला।

यह बम सुरक्षा काफिले को निशाना बनाने के लिए बनाया गया था, जिसमें विस्फोटक से 150 मीटर दूर कमांड स्विच सिस्टम लगा हुआ था। सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता और बीजापुर के बीडीएस तथा सीआरपीएफ 222वीं बटालियन की टीम ने मिलकर आईईडी को मौके पर ही नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस ऑपरेशन ने सुरक्षा बलों की तैयारी और कुशलता को दर्शाया।
बीजापुर में यह पहला ऐसा मामला नहीं है। फरवरी में, माओवादियों द्वारा लगाए गए 25 किलो के आईईडी को उसूर गांव से तीन किलोमीटर दूर उसूर-अवापल्ली मुख्य सड़क पर धान मंडी के पास पाया और नष्ट किया गया था। प्लास्टिक कंटेनर में छिपाए गए इस विस्फोटक को बीडीएस टीम ने निष्क्रिय कर दिया था।
ये प्रयास “2026 तक नक्सल-मुक्त भारत” अभियान के तहत चल रहे हैं। सुरक्षा बलों ने अपने ऑपरेशन तेज कर दिए हैं और हाल ही में दो मुठभेड़ों में 30 माओवादियों को ढेर कर दिया था—26 दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर और चार कांकेर में। हालांकि, इस ऑपरेशन में एक जिला रिजर्व गार्ड जवान की मौत हो गई, जबकि दो अन्य, जिनमें एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस भी शामिल है, गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन अब वे ठीक हो रहे हैं।
इससे पहले इसी महीने, बीजापुर जिले में माओवादियों ने सुरक्षाकर्मियों से भरी गाड़ी को निशाना बनाने के लिए एक आईईडी विस्फोट किया था। विस्फोट गाड़ी के निकलते ही हुआ, जिससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ। धमाके में दो जवानों और एक सिविलियन ड्राइवर को मामूली चोटें आईं, लेकिन बड़ी त्रासदी टल गई।




