मंगलुरु, उडुपी और मणिपाल को जोड़ने वाले मेट्रो रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहरी विकास विभाग ने इस परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। विभाग ने प्रमुख अधिकारियों से परियोजना की संभावना की जांच करने का अनुरोध किया है।
परियोजना की प्रगति
शहरी विकास विभाग के उप सचिव राजू पी ने बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMRCL) के प्रबंध निदेशक और दक्षिण कन्नड़ तथा उडुपी के उपायुक्तों को पूर्व KPCC सचिव और वर्तमान सदस्य एस. मोहनदास हेगड़े द्वारा प्रस्तुत व्यवहार्यता रिपोर्ट की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
हेगड़े ने 22 फरवरी को शहरी विकास विभाग के सचिव दीपा चोलन को एक पत्र के माध्यम से प्रस्तावित मेट्रो रेल कॉरिडोर की तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता पर एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। यह अध्ययन 2025-2030 की मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसमें मंगलुरु से मणिपाल तक 64 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन के महत्व को रेखांकित किया गया है।

परियोजना का रणनीतिक महत्व
प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य प्रमुख शहरी, अर्ध-शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। यह परियोजना मौजूदा परिवहन ढांचे, जैसे हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, हाईवे और बंदरगाहों, के साथ अच्छी तरह से एकीकृत होने की उम्मीद है। बढ़ती जनसंख्या और तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए, इस मेट्रो परियोजना को क्षेत्र के लिए एक स्थायी परिवहन समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
यह पहल राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन (NIP), स्मार्ट सिटी मिशन और गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ संरेखित है। परियोजना के डिजाइन में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) एकीकरण और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया है।
चरणबद्ध कार्यान्वयन और वित्तीय मॉडल
इस परियोजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण (2025-2027) में आधारभूत कार्य, भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दूसरे चरण (2028-2030) में बड़े पैमाने पर निर्माण, परीक्षण और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय तथा रेल मंत्रालय से विनियामक अनुमोदन प्राप्त करना शामिल होगा।
परियोजना के वित्तपोषण के लिए सरकारी फंडिंग, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और अंतरराष्ट्रीय निवेश का संयोजन प्रस्तावित है। रेल मंत्रालय, NITI आयोग और राज्य सरकार के साथ समन्वय आवश्यक होगा, साथ ही शहरी विकास और पर्यावरण प्राधिकरणों से अनुमोदन प्राप्त करना भी जरूरी होगा।
हेगड़े ने जोर देकर कहा कि तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय व्यवहार्यता, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव तथा जोखिम मूल्यांकन को कवर करते हुए एक व्यापक मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मेट्रो योजना राज्य के शहरी परिवहन दृष्टिकोण और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा विकास एजेंडा दोनों के साथ संरेखित है, जो क्षेत्र के लिए एक अच्छी तरह से जुड़ी और भविष्य के लिए तैयार मेट्रो प्रणाली सुनिश्चित करेगी।
अंतिम शब्द
यह मेट्रो परियोजना क्षेत्र के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह न केवल यातायात की सुविधा को बेहतर बनाएगी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति प्रदान करेगी। इसके सफल कार्यान्वयन से लाखों लोगों की जीवनशैली में सुधार होगा और क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।
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