मिड और स्मॉल कैप में भारी गिरावट: सेबी प्रमुख माधबी बुच ने कहा- ‘कोई टिप्पणी की जरूरत नहीं

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बाजार में हालिया उथल-पुथल

वित्त वर्ष 2024 में लार्ज-कैप शेयरों को पीछे छोड़ने वाले मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में हाल ही में भारी बिकवाली देखी गई है। निफ्टी स्मॉल कैप 100 सूचकांक 2025 में अब तक 18% तक गिर चुका है, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 में 13% की गिरावट दर्ज की गई है। ये दोनों सूचकांक सितंबर के अपने उच्चतम स्तर से लगभग 25% नीचे आ गए हैं, जो निवेशकों की बढ़ती सतर्कता, आर्थिक मंदी की चिंताओं और व्यापारिक तनावों को दर्शाता है।

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सेबी की चेयरपर्सन का रुख

“कोई नया बयान देने की जरूरत नहीं”

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में आई इस गिरावट पर टिप्पणी करने की जरूरत से इनकार किया है। मुंबई में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मार्च 2024 में दी गई अपनी चेतावनी का जिक्र किया, जब उन्होंने इन सेगमेंट्स में बुलबुले की आशंका जताई थी। उस समय उन्होंने बाजार में अधिक गर्मी के जोखिमों पर जोर दिया था और म्यूचुअल फंड्स से निवेशकों की सुरक्षा के लिए एक समान नीति अपनाने की बात कही थी।

उन्होंने कहा, “जब नियामक को लगा कि इस पर बयान देना जरूरी है, तब बयान दिया गया था। आज हमें कोई अतिरिक्त टिप्पणी की आवश्यकता नहीं लगती।” सेबी ने म्यूचुअल फंड ट्रस्टियों से बाजार में अस्थिरता के दौरान निवेशकों के पोर्टफोलियो को भुनाने में लगने वाले समय का आकलन करने के लिए स्ट्रेस टेस्ट भी अनिवार्य किया था।


म्यूचुअल फंड उद्योग में नए कदम

एएमएफआई की तीन नई पहल

मुंबई में एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में तीन प्रमुख पहलों की शुरुआत की गई:

1. छोटी एसआईपी

यह पहल छोटे निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। माधबी बुच ने कहा कि माइक्रो-एसआईपी को कुछ खास फंड्स तक सीमित करने की जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग इतना परिपक्व हो चुका है कि वह नए निवेशकों के लिए उपयुक्त और टिकाऊ उत्पाद चुन सकता है।

2. तरुण योजना

यह योजना स्कूली छात्रों में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत शिक्षकों को वित्तीय दूत के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। छात्रों के लिए वित्तीय ज्ञान का मूल्यांकन होगा, और बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को 24 महीने तक हर माह ₹100 की एसआईपी दी जाएगी। इसे पहले नौ जिलों में 5,000 छात्रों के साथ शुरू किया जाएगा, फिर पूरे देश में लागू किया जाएगा।

3. मित्र पहल

यह पहल निवेशकों और उनके उत्तराधिकारियों को भूले हुए या दावे न किए गए म्यूचुअल फंड निवेश को वापस पाने में मदद करेगी।


बाजार और नियामक नीतियां

थीम आधारित म्यूचुअल फंड पर नजर

माधबी बुच ने थीम आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं की बढ़ती संख्या पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नियमित योजनाओं और न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) के बीच नियामक अंतर के कारण इनकी संख्या बढ़ रही है। सेबी ने हाल ही में एनएफओ के लॉन्च के 30 दिनों के भीतर फंड को तैनात करने का नियम बनाया है, ताकि अनावश्यक फंड लॉन्च पर रोक लग सके।

वितरकों की जवाबदेही

“गलती हुई तो एएमसी जिम्मेदार”

म्यूचुअल फंड वितरकों द्वारा किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में सेबी ने सख्त रुख अपनाया है। बुच ने कहा, “अगर कोई वितरक गलत करता है, तो हम संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) को इसके लिए जवाबदेह ठहराएंगे।”

प्रचार और रिटर्न की गारंटी पर प्रतिबंध

एसआईपी पूरी करने पर स्विगी मनी जैसे प्रचार ऑफर पर सवाल उठने पर बुच ने साफ कहा कि रिटर्न की कोई गारंटी देना मना है। “कोई यह नहीं कह सकता कि आपको अंत में इतना मिलेगा। अगर आप पूछते हैं कि क्या यह अनुमति है, तो जवाब है नहीं।”


बाजार का हाल और निवेशकों की चिंता

मिड और स्मॉल कैप में भारी गिरावट

2025 में मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में आई गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। आर्थिक मंदी और वैश्विक व्यापारिक तनावों के बीच निवेशक जोखिम से बच रहे हैं। कई निवेशक, खासकर जिन्होंने कोविड के बाद सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश शुरू किया था, अब इसे रोकने पर विचार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार जल्द ही निचले स्तर पर स्थिर हो सकता है। एमके ग्लोबल ने कुछ चुनिंदा शेयरों में 70% तक की बढ़त की संभावना जताई है।

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