भारत में शतरंज के खिलाड़ियों को अब ग्रैंडमास्टर (GM), अंतर्राष्ट्रीय मास्टर (IM) और अंतर्राष्ट्रीय महिला मास्टर (IWM) खिताब जीतने पर सरकार की तरफ से दिए जाने वाले नकद पुरस्कार का लाभ नहीं मिलेगा। इससे पहले, इन खिताबों के लिए भारतीय शतरंज खिलाड़ियों को ₹4 लाख तक का पुरस्कार मिलता था, जबकि IM और IWM खिताब के लिए ₹1.5 लाख का नकद पुरस्कार मिलता था। हालांकि, यह पुरस्कार केवल 20 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों को ही मिलता था।
यह निर्णय खेल मंत्रालय ने लिया है, और यह बात अजीब लगती है, खासकर जब भारतीय शतरंज खिलाड़ी डी. गुकेश को हाल ही में विश्व चैंपियनशिप में सफलता मिली थी और उन्हें ‘महान ध्यानचंद खेल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, कोनेरु हम्पी ने विश्व रैपिड चैंपियनशिप जीतने के बाद और वैषाली रमेशबाबू ने ब्लिट्ज चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। ऐसे में मंत्रालय ने यह कदम क्यों उठाया है, यह सवाल खड़ा हो रहा है।
विरोध
भारत के प्रमुख ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरीगैसी ने इस निर्णय की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कदम शतरंज के क्षेत्र में एक बड़ी निराशा है और यह युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। अरीगैसी का मानना है कि यह निर्णय शतरंज के परिवार के लिए एक बड़ा धक्का है, क्योंकि यह उन खिलाड़ियों के लिए वित्तीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन था, जो शीर्ष खिलाड़ियों के ब्रांड और प्रायोजन के बिना संघर्ष करते हैं।
अजीब निर्णय
ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) के उपाध्यक्ष, दीब्येंदु बारुआ ने कहा कि इस निर्णय के बारे में AICF को कोई जानकारी नहीं दी गई थी और मंत्रालय ने बिना कोई चर्चा किए यह निर्णय लिया। बारुआ ने कहा, “यह एक अच्छा संकेत नहीं है, और मैं इसे अगले बैठक में उठाऊंगा ताकि मंत्रालय इस पर पुनर्विचार करे।” उनका कहना था कि यह कदम उन युवा खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक होगा, जिनके पास बड़े पैमाने पर वित्तीय समर्थन नहीं है।
मंत्रालय का तर्क
भारत के खेल मंत्रालय का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य उम्र धोखाधड़ी और डोपिंग पर नियंत्रण रखना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया जा सके। हालांकि, इस कदम के खिलाफ शतरंज जगत में असंतोष की भावना पाई जा रही है, और कई खिलाड़ी इसे निराशाजनक मानते हैं।





