रिपोर्ट- महेश नौटियाल
MPHC ON OBC : जबलपुर, मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है..हाईकोर्ट ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 14 फीसदी ही ओबीसी आरक्षण लागू रहेगा..साथ ही पिछले सालों से 13% होल्ड पदों पर 3 महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं…मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में 2019 में आरक्षण 14 से 27 फीसदी कर दिया था..बाद में इस फैसले को लेकर पक्ष और विपक्ष कई याचिकाएं दायर कर चुके थे..
MPHC ON OBC : ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फरमान, MP में 27 फीसदी देने से किया इनकार
मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ फैसला करने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को निर्देशित किया था…ओबीसी पक्ष ने अंतिम दलीलों में 27 फीसदी आरक्षण को बरकरार रखने की मांग की थी…उन्होंने तत्कालीन सरकार की ओर से अक्टूबर 2019 में दाखिल 555 पन्नों के जवाब का हवाला देते हुए ओबीसी की आबादी से संबंधित आंकड़े अदालत के सामने रखे थे…हाईकोर्ट के फैसले का सीधा असर उन सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों पर भी पड़ेगा, जिनमें 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के हिसाब से मामले लंबित नहीं होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी…इस कारण 13 फीसदी नियुक्तियां होल्ड पर रख दी गई थी…इससे पहले कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश में ओबीसी का आरक्षण बढ़ाकर 27 फीसदी करने की घोषणा की थी…इसके बाद यह मामला कोर्ट में चला गया था..

MPHC ON OBC : ओबीसी आरक्षण की क्रोनोलॉजी
तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अध्यादेश लाकर ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था, जिससे राज्य में कुल आरक्षण सीमा करीब 63% पहुंच गई
19 मार्च 2019
इस बढ़ोतरी के खिलाफ जबलपुर उच्च न्यायालय में मुख्य याचिका समेत 92 याचिकाएं दायर
कोर्ट ने इस पर नोटिस जारी कर अंतरिम व्यवस्था दी
जुलाई 2019
मध्य प्रदेश विधानसभा में सर्वसम्मति से 27% ओबीसी आरक्षण का विधेयक पारित
2021
च्च न्यायालय ने अपने आदेश में ओबीसी को 14% से अधिक आरक्षण दिए जाने और अन्य नियुक्तियों पर रोक संबंधी स्थिति स्पष्ट की
जनवरी 2024
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले से जुड़ी कुछ याचिकाओं पर सुनवाई और ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ी
मई-जून 2026
उच्च न्यायालय की जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की नई खंडपीठ में मामले की नियमित सुनवाई तय
15 जुलाई से 5 अगस्त 2026
उच्च न्यायालय में 27% ओबीसी आरक्षण बनाम 50% की सीमा के मुद्दे पर लगातार करीब 14 दिन अंतिम सुनवाई
9 अक्टूबर 2026
जबलपुर उच्च न्यायालय ने सुनाया बढ़ा फैसला
14% से बढ़ाकर 27% आरक्षण करने की मांग को किया खारिज
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% ही रहने का फैसला
पिछले सालों से 13% होल्ड पदों पर 3 महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश
MPHC ON OBC : आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला
1..मध्य प्रदेश अध्यादेश क्रमांक 2 फरवरी 2019 और संशोधन अधिनियम, 2019 ने सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में आरक्षण का प्रतिशत 14% से बढ़ाकर 27% निर्धारित किया था
2..हालांकि, उच्च शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, जैसा कि पूर्व के पैराग्राफ और तालिकाओं में दर्शाया गया है, यह प्रतीत होता है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है..वो पूरी तरह से मुख्यधारा का हिस्सा हैं..
3…यह मामला आरक्षण देने के बारे में नहीं है, बल्कि आरक्षण की सीमा के बारे में है..OBC निश्चित रूप से 14% की सीमा तक आरक्षण पाने के हकदार हैं.. हालांकि, आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का कोई मामला नहीं बनता है.
5…माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इंद्रा साहनी (सुप्रा) के मामले में पैरा 810 में दिए गए निर्णय और बाद में जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल (सुप्रा) के मामले में दोहराए गए अनुसार, कोई असाधारण परिस्थिति या आपात स्थिति मौजूद नहीं है..इसलिए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्धारित 50% की अधिकतम सीमा का पालन किया जाना है..इस प्रकार, OBC सार्वजनिक सेवाओं और उच्च शिक्षा में 27% नहीं, बल्कि 14% तक आरक्षण के हकदार हैं..
6..संशोधन अधिनियम, 2019 के अनुसरण में दिनांक 29.09.2022 तक की गई नियुक्तियां, जब सामान्य प्रशासन विभाग ने अंतरिम राहत के बारे में स्थिति स्पष्ट की..सुरक्षित रहेंगी और OBC उम्मीदवार, जो इस अवधि यानी मार्च 2019 से 29.09.2022 के बीच 14% से अधिक नियुक्त किए गए हैं, अपनी नौकरियों में बने रहेंगे और उन्हें हटाया नहीं जाएगा.. उनकी नियुक्तियां सुरक्षित हैं.. इन पदों को अगले तीन भर्ती अभियानों में समाहित और समायोजित किया जाएगा..
7..29.09.2022 के बाद की गई सभी नियुक्तियां केवल 87% की सीमा तक ही की गई हैं..शेष 13% उम्मीदवारों के लिए, नियुक्ति अनारक्षित वर्ग की सूची से दी जाएगी..दूसरे शब्दों में, वो 13% पद अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से भरकर 100% सीटें पूरी की जाएंगी..
8.. सभी भर्ती एजेंसियां जैसे म MPPSC या म.प्र. राज्य कर्मचारी चयन मंडल आदि अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के लिए आवश्यक कार्यवाही बाहरी सीमा के रूप में तीन महीने के भीतर करेंगी..


