UNSC : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की भारत समेत कई देशों की मांग के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर इसका विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा है कि इस्लामाबाद सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को शामिल किए जाने के पक्ष में नहीं है।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिम इफ्तिखार अहमद ने इसके बजाय सुरक्षा परिषद में निर्वाचित यानी अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की वकालत की है। उनका कहना है कि इससे परिषद को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
UNSC : भारत का नाम लिए बिना रखी पाकिस्तान की स्थिति
आसिम इफ्तिखार अहमद ने अपने बयान में भारत का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन पाकिस्तान का यह रुख भारत की लंबे समय से चली आ रही UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग के विरोध से जुड़ा हुआ है। भारत के साथ ब्राजील, जर्मनी और जापान भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के विस्तार की मांग करते रहे हैं।
पाकिस्तान इससे अलग सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के बजाय निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करता है। पाकिस्तान पहले भी संयुक्त राष्ट्र में इसी नीति को दोहरा चुका है।
UNSC : पाकिस्तान के अनुसार स्थायी सदस्य बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी
आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि हाल के वर्षों में वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच इस सोच को मजबूत किया है कि सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व वाली और जवाबदेह संस्था बनाया जाना चाहिए।
उनके मुताबिक किसी नए देश को स्थायी सदस्य बना देने से सुरक्षा परिषद की मौजूदा समस्याओं का समाधान नहीं होगा। पाकिस्तान का तर्क है कि स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के बजाय निर्वाचित सदस्यों को अधिक भूमिका और प्रतिनिधित्व देना परिषद में संतुलन बनाने का बेहतर तरीका हो सकता है।
UNSC : अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग
पाकिस्तान के राजदूत ने सुरक्षा परिषद में निर्वाचित और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि ऐसे सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रति जवाबदेह होते हैं और उनके चुनाव के कारण परिषद में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकता है।
पाकिस्तान का मानना है कि इससे सुरक्षा परिषद में ज्यादा देशों को अपनी बात रखने और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े फैसलों में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
UNSC : यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह का समर्थन
पाकिस्तान सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ यानी UfC समूह का हिस्सा है। यह समूह नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने का विरोध करता है और इसके बजाय निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने तथा लंबे कार्यकाल वाली रोटेशनल सीटों की व्यवस्था का समर्थन करता है।
सितंबर 2026 में समूह के 12 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने का विरोध दोहराया था। इस समूह में पाकिस्तान के साथ इटली, तुर्किए, कनाडा, दक्षिण कोरिया, स्पेन, अर्जेंटीना और अन्य देश शामिल हैं।
UNSC : पाकिस्तान ने खुद को UNSC में बड़ी भूमिका के योग्य बताया
आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि पाकिस्तान और कई अन्य देश अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में योगदान देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। उनके मुताबिक किसी देश को स्थायी सदस्यता या विशेषाधिकार दिए बिना भी वह सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारियों में प्रभावी योगदान दे सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में जिम्मेदारी निभाने का आधार स्थायी सदस्यता नहीं, बल्कि सदस्य देशों की जवाबदेही और व्यापक प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
UNSC : पाकिस्तान पहले भी कर चुका है स्थायी सीटों का विरोध
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने UNSC में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया है। अप्रैल 2026 में भी पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों और वीटो शक्ति के विस्तार का विरोध किया था।
पाकिस्तान ने उस समय कहा था कि ज्यादा स्थायी सदस्य और ज्यादा वीटो शक्तियां सुरक्षा परिषद में निर्णय लेने की प्रक्रिया को और मुश्किल बना सकती हैं। इस्लामाबाद ने वीटो के इस्तेमाल को सीमित करने या इसे समाप्त करने की दिशा में भी चर्चा की वकालत की थी।
UNSC सुधार पर G4 और UfC के बीच मतभेद
सुरक्षा परिषद के सुधार को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अलग-अलग देशों और समूहों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान वाला G4 समूह स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग करता है।
इसके विपरीत पाकिस्तान के नेतृत्व वाले UfC समूह का कहना है कि सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधित्व वाली बनाने के लिए गैर-स्थायी और निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इसी मतभेद के कारण UNSC सुधार की प्रक्रिया लंबे समय से जटिल बनी हुई है।
UNSC : सुरक्षा परिषद में अभी पांच स्थायी सदस्य
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं, जबकि 10 सदस्य गैर-स्थायी होते हैं और उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है।
स्थायी सदस्यों के पास वीटो का विशेष अधिकार है। UNSC सुधार की बहस में सबसे बड़ा विवाद इसी बात को लेकर है कि नए स्थायी सदस्यों को शामिल किया जाए या नहीं और अगर शामिल किया जाए तो उन्हें वीटो का अधिकार मिले या नहीं। पाकिस्तान नए स्थायी सदस्यों के साथ वीटो के विस्तार का भी विरोध करता रहा है।
UNSC : भारत की स्थायी सदस्यता की मांग पर फिर बढ़ी बहस
पाकिस्तान का ताजा रुख ऐसे समय सामने आया है जब UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग कर रहा है और इसके समर्थन में अपनी वैश्विक भूमिका तथा संयुक्त राष्ट्र के अभियानों में योगदान को प्रमुख आधार के रूप में रखता रहा है।
वहीं पाकिस्तान का कहना है कि सुधार का रास्ता नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के बजाय ज्यादा देशों को निर्वाचित सदस्य के तौर पर सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व देने से होकर गुजरना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की स्थिति फिलहाल एक-दूसरे से अलग बनी हुई है।
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