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Saudi Oil Crisis: ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब पर तेल संकट, पाइपलाइन बंद रही तो कुछ दिनों में खत्म हो सकता है स्टॉक

Saudi Oil Crisis ने मिडिल ईस्ट के साथ-साथ ग्लोबल एनर्जी मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब की एक बेहद महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद इसे बंद कर दिया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए खाड़ी क्षेत्र से कच्चा तेल लाल सागर के तट तक पहुंचाया जाता है। पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो सऊदी अरब के पास निर्यात के लिए उपलब्ध तेल का भंडार तेजी से कम हो सकता है।

Saudi Oil Crisis: ड्रोन हमले के बाद बंद हुई अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन

Saudi Oil Crisis की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का ठप होना है। यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और देश के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के किनारे स्थित यानबू तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए भी किया जाता है।

Saudi Oil Crisis के बीच रिपोर्टों के मुताबिक ड्रोन हमले से पाइपलाइन के एक पंपिंग स्टेशन को काफी नुकसान पहुंचा है। सऊदी अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से पाइपलाइन का संचालन रोक दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों में भी पाइपलाइन से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं। पाइपलाइन कब तक पूरी तरह बहाल होगी, इसे लेकर अभी निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।

Saudi Oil Crisis: 4 फीसदी तक ग्लोबल सप्लाई पर असर का खतरा

Saudi Oil Crisis का असर केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल तेल यानबू तक पहुंचाया जा सकता है। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के करीब 4 फीसदी के बराबर है। ऐसे में लंबे समय तक पाइपलाइन बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

Saudi Oil Crisis के कारण तेल बाजार में पहले ही तेजी देखने को मिली है। ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि सऊदी अरब की तेल उत्पादन क्षमता पहले से ही दबाव में है और क्षेत्र में होर्मुज तथा लाल सागर से जुड़े शिपिंग मार्गों पर भी तनाव बना हुआ है।

Saudi Oil Crisis: कुछ दिनों में खत्म हो सकता है निर्यात स्टॉक

Saudi Oil Crisis में सबसे गंभीर चिंता सऊदी अरब के निर्यात स्टॉक को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक यानबू और लाल सागर क्षेत्र में उपलब्ध भंडार पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में केवल कुछ दिनों तक निर्यात को बनाए रखने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। कुछ आकलनों में यह अवधि करीब पांच से सात दिन बताई गई है।

Saudi Oil Crisis के बीच पाइपलाइन की मरम्मत में कितना समय लगेगा, यह भी अहम सवाल है। अलग-अलग आकलनों में आंशिक संचालन कुछ दिनों में शुरू होने से लेकर पूरी मरम्मत में कई सप्ताह लगने तक की संभावना जताई गई है। अगर बहाली में ज्यादा समय लगा तो सऊदी अरब को अपने तेल निर्यात मार्गों और उपलब्ध स्टॉक पर अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

Saudi Oil Crisis: सऊदी शेयर बाजार पर भी दिखा असर

Saudi Oil Crisis का असर सऊदी शेयर बाजार पर भी पड़ा है। सोमवार को सऊदी अरब का बेंचमार्क शेयर इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 0.3 फीसदी नीचे आया। इससे पहले रविवार को इंडेक्स में 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। तेल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया।

Saudi Oil Crisis के बीच सऊदी अरामको समेत प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट बाजार की चिंता को दिखाती है। निवेशकों की नजर अब पाइपलाइन की मरम्मत, तेल निर्यात की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर बनी हुई है।

Saudi Oil Crisis: बढ़ सकती है दुनिया भर में महंगे तेल की चिंता

Saudi Oil Crisis ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक तेल बाजार पहले ही मिडिल ईस्ट के तनाव से प्रभावित है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता ने तेल की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को मुश्किल बनाया है। सऊदी अरब की पाइपलाइन बंद होने से इन चिंताओं को और बल मिला है।

Saudi Oil Crisis का असर अगर लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसका प्रभाव पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन, उद्योग और महंगाई तक पर पड़ने की आशंका है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब अपनी महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन को कितनी जल्दी बहाल कर पाता है।