Jhiram Ghati NIA Verdict : खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने असंतोष जताया है। खैरागढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू ने कहा कि पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन वह इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि मामले में केवल आरोपियों को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमले के पीछे की पूरी साजिश और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।
5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। अदालत ने दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर को सुनाने की बात कही है।
Jhiram Ghati NIA Verdict पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू ने कहा कि Jhiram Ghati NIA Verdict के बाद भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है। कांग्रेस के मुताबिक इतने बड़े स्तर पर हुए हमले के पीछे केवल कुछ लोगों की भूमिका मान लेना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 लोगों की मौत हुई थी। पार्टी का दावा है कि घटना के पीछे मौजूद बड़े नक्सली कमांडरों और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका को लेकर अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मामले की जांच उस स्तर तक पहुंचनी चाहिए, जहां से हमले की पूरी योजना, उसके पीछे की रणनीति और इसमें शामिल प्रमुख लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
Jhiram Ghati NIA Verdict : बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की जांच की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि झीरम घाटी मामले में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ की जाए। पार्टी का मानना है कि उनके जरिए हमले की योजना बनाने वाले और कथित मुख्य सरगनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है।
कोमल साहू ने कहा कि जांच एजेंसियों को इस दिशा में भी गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए। कांग्रेस का जोर इस बात पर है कि झीरम घाटी की घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और किसी भी संभावित साजिश को जांच के दायरे से बाहर न रखा जाए।
Jhiram Ghati NIA Verdict : 13 साल बाद आया अदालत का फैसला
Jhiram Ghati NIA Verdict करीब 13 साल बाद सामने आया है। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और विद्याचरण शुक्ल सहित कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 और 32 बताई गई है, जिसका अंतर घटनाक्रम में शामिल विभिन्न श्रेणियों के लोगों की गणना से जुड़ा है।
NIA की विशेष अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। वहीं, एक आरोपी की मुकदमे की कार्यवाही के दौरान मौत हो गई थी। अब दोषियों को मिलने वाली सजा पर 16 सितंबर को फैसला होना है।
Jhiram Ghati NIA Verdict : कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जाने के दिए संकेत
खैरागढ़ में पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि पार्टी मामले को आगे न्यायिक स्तर पर ले जाने पर विचार कर रही है। पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात भी कही गई है।
कांग्रेस का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया केवल दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पार्टी चाहती है कि घटना के पीछे की कथित बड़ी साजिश, नक्सली नेतृत्व की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों की भी पूरी पड़ताल हो।
Jhiram Ghati NIA Verdict : कांग्रेस बोली- फैसले का सम्मान, लेकिन कई सवाल बाकी
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि अदालत के फैसले का अनादर नहीं किया जा रहा है। पार्टी न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन उसका मानना है कि झीरम घाटी कांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब अभी नहीं मिला है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी फैसले को लेकर असंतोष जताते हुए कहा है कि इतने बड़े हमले के पीछे शीर्ष स्तर के माओवादी नेतृत्व की भूमिका की जांच जरूरी थी। उन्होंने NIA की जांच को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।
Jhiram Ghati NIA Verdict : झीरम घाटी मामले में आगे क्या होगा?
फिलहाल 10 आरोपियों के दोषी ठहराए जाने के बाद अगली बड़ी तारीख 16 सितंबर है, जब अदालत सजा की अवधि तय करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के चलते मामले की जांच और कथित बड़ी साजिश का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
Jhiram Ghati NIA Verdict के बाद अब निगाहें एक ओर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर भी रहेंगी।


