Middle East War : मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध अब और तेज हो गई है… पिछले चार महीनों से जारी तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां एक चिंगारी पूरे क्षेत्र को तीसरे वर्ल्ड वॉर में धकेल सकती है। इस जंग की आंच अब सिर्फ ईरान, अमेरिका और इजरायल तक सीमित नहीं रही, बल्कि खाड़ी देशों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
होर्मुज स्ट्रेट से लेकर चाबहार पोर्ट तक… ऊर्जा सुरक्षा से लेकर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन तक… हर मोर्चे पर दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई है। आखिर इस तनाव का अंत कब होगा? क्या बातचीत का रास्ता खुलेगा या मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है? आज की बहस में हम समझेंगे..अमेरिका-ईरान की जंग क्यों नहीं थम रही? क्या होर्मुज स्ट्रेट बना है इस संघर्ष का नया केंद्र? और इस युद्ध का भारत समेत पूरी दुनिया पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है?

Middle East War : अमेरिका-ईरान में टकराव, मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव
पिछले 4 महीनों से जारी मिडिल ईस्ट का तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.. अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। दोनों देशों की ओर से लगातार एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं..अमेरिका ने पिछले तीन दिनों में ही ईरान के 300 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। उधर इन हमलों के जवाब में ईरान भी पलटवार करने में देरी नहीं कर रहा है..ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है….
Middle East War : अमेरिका और ईरान में शुरु हुई भीषण जंग, अब होर्मुज स्टेट से चाबहार तक बमबारी
खबरों के मुताबिक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन मिसाइल दागी जा रही है.. हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के दावे अपने-अपने हैं। लेकिन अब इस संघर्ष का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। दुनिया भर के बाजारों, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्टेट समेत अन्य रास्तों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से ही इसके साइड इफेक्ट पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ा है। समुद्री मार्गों में बढ़ती असुरक्षा के कारण जहाजों को लंबे और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत बढ़ी है और इसका असर कच्चे तेल, गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ा है।
इसका ताजा उदाहरण हाल ही में ओमान तट के पास भारतीय व्यापारी जहाज GFS Galaxy पर हुआ हमला है। हालांकि जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। भारतीय दूतावास ओमान सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और सर्च ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है।
इस तनाव के बीच चाबहार पोर्ट पर हमले की खबर ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। चाबहार भारत के लिए बेहद अहम रणनीतिक प्रोजेक्ट है। ओमान की खाड़ी के पास स्थित इस पोर्ट के जरिए भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच मिलती है। भारत 2002 से इस परियोजना से जुड़ा है और अब तक इसमें 120 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है। यही वजह है कि चाबहार पर किसी भी खतरे को भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों से जोड़कर देख रहा है।
सवाल ये है कि मिडिल ईस्ट में पिछले 4 महीनों से भी अधिक से चल रहा तनाव आखिर खत्म क्यों नहीं हो रहा है..अमेरिका ईरान जंग थम क्यों नहीं रही है ? आइए जानते हैं कौन से वे बड़े कारण हैं..
पहला कारण- ईरान के नेता इस बात पर एकमत नहीं हैं, कुछ लोग समझौता चाहते हैं जबकि कट्टरपंथी गुट अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।
दूसरा कारण-ईरान को अपनी क्षमता पर ओवर कॉनफिडेंस है, उसे लगता है कि अगर लड़ाई लंबी चली तो अमेरिका पर समझौता करने का दबाब बढेगा, इसलिए वह अभी पीछे हटना नहीं चाहता।
तीसरा-कारण अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाज बिना रोक-टोक गुजरे, लेकिन ईरान वहां अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, इसी वजह से तनाव बना हुआ है।
चौथा कारण-ईरान अब सिर्फ परमाणु समझौते पर नहीं बल्कि होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ बनाए रखने पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसलिए वह सैन्य दबाब जारी रखे हुए हैं.
पांचवा कारण- अमेरिका और ईरान दोनों ही पश्चिम एशिया में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं।
छठवां कारण- इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से दुश्मनी चली आ रही है। इजरायल की सुरक्षा अमेरिका की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ईरान समर्थित समूहों और इजरायल के बीच टकराव ने अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ाया है। GFX OUT
Middle East War :US बनाम ईरान क्यों थम नहीं रही जंग?
- पहला कारण- ईरान की लीडरशिप एकमत नहीं
- दूसरा कारण- ईरान अपनी सैन्य क्षमता पर अतिआत्मविश्वाम
- तीसरा कारण- अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट पर चाहता है नियंत्रण
- चौथा कारण- ईरान परमाणु समझौते के साथ होर्मुज स्ट्रेट पर चाहता है पूरा नियंत्रण
- पांचवां कारण- मिडिल ईस्ट में दबदबे की लड़ाई
- छठवां कारण- इजरायल-ईरान तनाव का असर
मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। ईरान में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है, अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट छाया है और आम लोगों की जिंदगी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल को भी सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसके बावजूद दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। बढ़ता तनाव अब वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। सवाल यही है कि यह जंग कब थमेगी… क्योंकि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत हमेशा आम इंसान को ही चुकानी पड़ती है।

