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Swadesh News > राज्य > दिल्ली > Supreme Court AI : सुप्रीम कोर्ट की AI पर सख्त टिप्पणी: ‘विनाशकारी’ बताया, कहा- हर स्तर पर इंसानी दखल है जरूरी
दिल्ली

Supreme Court AI : सुप्रीम कोर्ट की AI पर सख्त टिप्पणी: ‘विनाशकारी’ बताया, कहा- हर स्तर पर इंसानी दखल है जरूरी

Rajkumar Sisodiya
Last updated: July 2, 2026 4:22 pm
By Rajkumar Sisodiya
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5 Min Read
सुप्रीम कोर्ट ने AI के गलत इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में इंसानी हस्तक्षेप को अनिवार्य बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने AI से तैयार फर्जी कानूनी उदाहरणों के आधार पर दिए गए NCLT के फैसले को रद्द करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में मानव सत्यापन को अनिवार्य बताया।
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Supreme Court AI : सुप्रीम कोर्ट ने AI के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंता

Supreme Court AI : सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनियंत्रित और गलत इस्तेमाल को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे कुछ परिस्थितियों में “विनाशकारी” बताया है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में AI केवल एक सहायक तकनीक हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय और सत्यापन की जिम्मेदारी पूरी तरह इंसानों की ही होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि AI के हर स्तर पर मानव हस्तक्षेप अनिवार्य है।

Contents
Supreme Court AI : सुप्रीम कोर्ट ने AI के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंताSupreme Court AI : फर्जी AI कंटेंट के कारण NCLT का फैसला रद्दSupreme Court AI : AI के गलत इस्तेमाल की ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ से तुलनाSupreme Court AI : जज और वकीलों के लिए कोर्ट की सख्त चेतावनीSupreme Court AI : AI सहायक हो सकता है, लेकिन निर्णय इंसान ही लेंSupreme Court AI : बार काउंसिल को दिशा-निर्देश बनाने के निर्देशSupreme Court AI : क्या था पूरा मामला?
Supreme Court AI

Illegal Murum Mining: कथित अवैध मुरूम उत्खनन की जांच की मांग, जिला खनिज विभाग को सौंपी गई शिकायत

Supreme Court AI : फर्जी AI कंटेंट के कारण NCLT का फैसला रद्द

यह टिप्पणी एसेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े दिवालियापन मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें AI से तैयार किए गए काल्पनिक और अस्तित्वहीन न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसे फर्जी उदाहरणों पर आधारित कोई भी न्यायिक निर्णय कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

Supreme Court AI : AI के गलत इस्तेमाल की ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ से तुलना

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने AI के दुरुपयोग की तुलना जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट से करते हुए कहा कि फर्जी और मनगढ़ंत सामग्री का न्यायिक प्रक्रिया में उपयोग अदृश्य, कपटी और बेहद विनाशकारी है। कोर्ट के अनुसार, जब तक इसकी पहचान होती है, तब तक यह न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा चुका होता है।

Supreme Court AI : जज और वकीलों के लिए कोर्ट की सख्त चेतावनी

Delhi Police Special Cell Terror Plot: दिल्ली में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम: ISI हैंडलर के इशारे पर थानों और धार्मिक स्थलों की हो रही थी रेकी, स्पेशल सेल ने दबोचे 4 संदिग्ध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई वकील बिना सत्यापन किए AI से तैयार फर्जी मामलों का हवाला देता है, तो यह पेशेवर कदाचार माना जाएगा। वहीं, यदि कोई न्यायाधीश ऐसे फर्जी उदाहरणों के आधार पर फैसला सुनाता है, तो यह गंभीर न्यायिक त्रुटि होगी। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए हर तथ्य और न्यायिक उदाहरण का सत्यापन आवश्यक है।

Supreme Court AI : AI सहायक हो सकता है, लेकिन निर्णय इंसान ही लें

कोर्ट ने माना कि AI कार्यक्षमता बढ़ाने और काम का बोझ कम करने में मददगार साबित हो सकता है। दुनिया के कई क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और ब्रिटेन की AI आधारित लॉ फर्म का उदाहरण भी दिया गया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि AI पर पूरी तरह निर्भरता बढ़ी तो यह इंसानी निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अंतिम निर्णय का अधिकार हमेशा इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

Supreme Court AI : बार काउंसिल को दिशा-निर्देश बनाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि AI से जुड़े फर्जी कानूनी दस्तावेजों और मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं। साथ ही ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

Supreme Court AI : क्या था पूरा मामला?

यह मामला एसेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स की निलंबित निदेशक पूजा रमेश सिंह की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने NCLT के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जम्मू एंड कश्मीर बैंक की याचिका पर कंपनी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि NCLT ने अपने फैसले के समर्थन में AI द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक न्यायिक उदाहरणों का उपयोग किया था। इसके बाद अदालत ने NCLT और NCLAT दोनों के आदेश रद्द करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए।

read more : Vishnu Deo Sai: जांजगीर-चांपा और सक्ती दौरे पर रवाना हुए सीएम विष्णु देव साय, AI मिशन से लेकर किसानों तक कई मुद्दों पर दिया बड़ा बयान

TAGGED:AI in JudiciaryAI LawAI Regulationartificial intelligencecourt newsIndia JudiciaryLegal TechnologyNCLATNCLTSupreme Court AI
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