Uniform Civil Code : भोपाल, 3 जून 2026। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही हैं और देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए माहौल तैयार है।
Uniform Civil Code : पूरे देश में UCC लागू करने की तैयारी
रामेश्वर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में UCC लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भी UCC को लेकर एक समिति का गठन किया है, जो विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सुझाव देगी।

Uniform Civil Code : कांग्रेस जनसंख्या नियंत्रण पर इंदिरा गींधी के परिवार नियोजन अभियान को याद करे
विधायक शर्मा ने जनसंख्या और सामाजिक संतुलन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सभी समुदायों के लिए समान नियम होने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के परिवार नियोजन अभियान की याद दिलाते हुए जनसंख्या नियंत्रण पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की।
रामेश्वर शर्मा ने दावा किया कि देश के कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बदलाव देखने को मिला है और इससे सामाजिक एवं धार्मिक तनाव की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि UCC से सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित होगी और सामाजिक समरसता को मजबूती मिलेगी।
भाजपा विधायक ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकारें भविष्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि UCC को लेकर देश में व्यापक समर्थन का माहौल बन रहा है।
गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। समर्थकों का मानना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून सुनिश्चित होंगे, जबकि विरोधी पक्ष विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा की आवश्यकता बता रहा है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) ऐसा कानून है, जिसके तहत देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू होते हैं। वर्तमान में भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। उदाहरण के लिए हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों और पारसियों के लिए विवाह और उत्तराधिकार संबंधी अलग कानून हैं।
भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles) के अनुच्छेद 44 में राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है। हालांकि यह प्रावधान न्यायालय द्वारा सीधे लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन यह सरकारों के लिए एक संवैधानिक मार्गदर्शन है।
UCC के समर्थकों का मानना है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और कानून के सामने सभी बराबर होंगे। उनका तर्क है कि अलग-अलग पर्सनल लॉ की व्यवस्था कई बार लैंगिक असमानता और कानूनी जटिलताओं को जन्म देती है। समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल बनेगी।
वहीं, UCC के विरोधी पक्ष का कहना है कि भारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। ऐसे में एक समान कानून लागू करने से कुछ समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि इस विषय पर व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक है।
देश में फिलहाल केवल उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू की है। इसके अलावा कई राज्य इस विषय पर अध्ययन और सुझाव लेने की प्रक्रिया में हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने भी UCC को लेकर एक समिति का गठन किया है, जो विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी।
कुल मिलाकर, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित करना है। हालांकि यह विषय कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, इसलिए इसे लेकर देश में लगातार बहस और चर्चा जारी है।

