Report: Prem Shrivastva
Animal Welfare and Environment Protection झुलसा देने वाली गर्मी के इस मौसम में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशु-पक्षी भी पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में जमशेदपुर के डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (बर्मामाइंस) के छात्रों ने मानवता और संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। विद्यालय के बच्चों ने मिलकर बर्मामाइंस और उसके आसपास के इलाकों में 50 से अधिक सीमेंट के जलपात्र (वाटर पॉट) लगाए हैं, ताकि लावारिस घूम रहे जानवरों और पक्षियों को पीने का साफ पानी मिल सके।
Animal Welfare and Environment Protection किताबी ज्ञान से आगे: बच्चों में बोए गए करुणा के बीज
यह पूरी मुहिम स्कूल के ‘सोशल इमोशनल लर्निंग’ (SEL) यानी सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा कार्यक्रम का एक हिस्सा थी। स्कूल का मानना है कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके भीतर दया, करुणा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना भी उतना ही जरूरी है। इस अभियान के तहत बच्चों ने न केवल खुद जाकर इन बर्तनों को सही जगहों पर स्थापित किया, बल्कि उनमें पानी भरकर इस नेक काम की शुरुआत भी की।
Animal Welfare and Environment Protection जन-भागीदारी पर जोर: स्थानीय लोगों को भी जोड़ा
छात्रों की यह मुहिम सिर्फ बर्तन रखने तक सीमित नहीं रही। बच्चों ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए बर्मामाइंस, जेमको, भक्ति नगर और लक्ष्मी नगर के स्थानीय निवासियों से भी मुलाकात की। उन्होंने लोगों को समझाया कि वे इन बर्तनों की देखरेख करें और इनमें रोज नियम से पानी बदलें। बच्चों की इस समझदारी ने स्थानीय लोगों को भी इस पुण्य कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
Animal Welfare and Environment Protection सच्ची शिक्षा का मकसद: संवेदनशील नागरिक तैयार करना
इस सराहनीय कदम पर स्कूल की प्रभारी प्राचार्या रंजिता गांधी ने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो बच्चों को एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाए। केवल किताबी ज्ञान से बच्चों का पूर्ण विकास नहीं हो सकता, उन्हें सामाजिक चेतना देना भी बेहद जरूरी है। इस पूरे अभियान को सफल बनाने में शिक्षिका मोना भूमिज और स्कूल के बच्चों ने मिलकर मेहनत की, जो आज पूरे समाज के लिए पर्यावरण और जीव संरक्षण की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है।
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