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Auto-Brewery Syndrome : बिना शराब पिए चढ़ जाता है नशा! खाना खाते ही शरीर में बनने लगता है अल्कोहल, दुर्लभ बीमारी देख डॉक्टर हैरान

Auto-Brewery Syndrome

Auto-Brewery Syndrome : दुनिया में कई ऐसी अजीबोगरीब और दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनके बारे में सुनकर आम इंसान तो क्या, डॉक्टर्स भी दंग रह जाते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक शख्स पिछले 10 साल से बिना शराब की एक बूंद पिए भी हमेशा नशे में रहता था। लोग उसे शराबी समझते थे, लेकिन जब डॉक्टरों ने गहराई से जांच की तो असली वजह जानकर हर कोई हैरान रह गया। दरअसल, यह शख्स ‘ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम’ (Auto-Brewery Syndrome) नाम की एक बेहद दुर्लभ मेडिकल स्थिति से पीड़ित था, जिसमें इंसान का शरीर भोजन मिलने पर खुद ही अल्कोहल का निर्माण करने लगता है।

Auto-Brewery Syndrome क्या है ‘ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम’ और शरीर में कैसे बनती है शराब?

ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम, जिसे गट फर्मेंटेशन सिंड्रोम (Gut Fermentation Syndrome) भी कहा जाता है, एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में व्यक्ति के पेट और आंतों (Digestive System) में फंगस या यीस्ट (Yeast) की तादाद बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जब यह मरीज कार्बोहाइड्रेट (जैसे चावल, रोटी, चीनी आदि) से भरपूर खाना खाता है, तो पेट में मौजूद यह यीस्ट उस खाने को फर्मेंट (किण्वन) करके सीधे एथेनॉल (Pure Alcohol) में बदल देता है। यानी खाना खाते ही मरीज का पेट खुद की शराब भट्टी (Brewery) की तरह काम करने लगता है और अल्कोहल खून में मिलकर नशा पैदा कर देता है।

Auto-Brewery Syndrome 10 साल तक ‘झूठा शराबी’ बना रहा शख्स, झेलनी पड़ीं सामाजिक मुश्किलें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रभावित व्यक्ति लगभग एक दशक से इस रहस्यमयी परेशानी से जूझ रहा था। उसे अक्सर बिना वजह चक्कर आते थे, सिर भारी रहता था, चलने में पैर लड़खड़ाते थे और बोलने में आवाज लड़खड़ाने लगती थी। रोजमर्रा के काम करना भी उसके लिए दूभर हो गया था। सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि कोई उसकी बात पर यकीन नहीं करता था। परिवार और समाज के लोग उसे ‘चोरी-छिपे शराब पीने वाला’ समझने लगे थे। लगातार लग रहे आरोपों के बीच जब उसने डॉक्टरों की शरण ली, तब जाकर इस खौफनाक बीमारी का पर्दाफाश हुआ।

Auto-Brewery Syndrome इस बीमारी के मुख्य लक्षण और बचाव के उपाय

चिकित्सकों के अनुसार, इस बीमारी के लक्षण बिल्कुल अत्यधिक शराब पीने वाले व्यक्ति जैसे ही होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • बिना शराब पिए भी मुंह से अल्कोहल की बदबू आना।
  • क्रोनिक फटीग (हर वक्त अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होना)।
  • याददाश्त कमजोर होना, मानसिक धुंधलापन (Brain Fog) और मूड स्विंग्स।
  • पेट फूलना, गैस बनना और पाचन क्रिया का पूरी तरह बिगड़ जाना।

इलाज और बचाव: डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी से राहत पाने के लिए मरीजों को अपनी डाइट में से कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा को बिल्कुल खत्म या बेहद कम करना पड़ता है। इसके साथ ही पेट के यीस्ट को खत्म करने के लिए एंटी-फंगल दवाइयां और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए प्रोबायोटिक्स दिए जाते हैं।

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