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Lucknow “ज्ञान भारतम् मिशन” के जरिए सुरक्षित होगा भारत का स्वर्णिम इतिहास: सीएम योगी ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी ‘पाती’

Lucknow

Report: Vandna rawat

Lucknow उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की जनता के नाम एक भावुक और विचारशील ‘पाती’ (पत्र) लिखी है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू किए गए सरकार के महत्वाकांक्षी “ज्ञान भारतम् मिशन” की रूपरेखा साझा की है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि भारत की वास्तविक पहचान और उसकी आत्मा इन दुर्लभ पांडुलिपियों में ही सुरक्षित है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पीएम भी पांडुलिपियों को भारत के गौरवशाली इतिहास का सबसे अहम अध्याय मानते हैं।

Lucknow वेद, विज्ञान और कला का अनूठा दस्तावेज हैं पांडुलिपियाँ

Lucknow अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे कालजयी ग्रंथ हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर हैं। ये पांडुलिपियाँ केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि इनमें प्राचीन भारत का उन्नत विज्ञान, गणित, चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) और विभिन्न कलाओं का अगाध ज्ञान समाहित है। यह हमारी समृद्ध सोच और विकसित सभ्यता का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हमेशा से सनातन संस्कृति का मुख्य केंद्र रहा है, जहां अयोध्या और काशी जैसी पावन नगरियां हमारी महान परंपराओं और इतिहास का प्रतिनिधित्व करती हैं।

Lucknow डिजिटल लाइब्रेरी से वैश्विक पटल पर चमकेगा भारत का ज्ञान

“ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत राज्य सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। इसके अंतर्गत सभी प्राचीन और जर्जर हो रही पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक के जरिए डिजिटल स्वरूप (Digitization) में बदला जा रहा है। सरकार जल्द ही एक विशाल डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना करेगी, जिससे यह अमूल्य ज्ञान दुनिया भर के शोधकर्ताओं और आम जनमानस के लिए एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। सीएम योगी ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि इस अभियान के तहत अब तक 7 लाख से अधिक पांडुलिपियों की खोज की जा चुकी है, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।

Lucknow जनभागीदारी से बनेगा विकसित भारत 2047

मुख्यमंत्री ने इस मिशन को एक जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि यदि किसी परिवार, संस्था या व्यक्ति के पास कोई भी प्राचीन पांडुलिपि या दुर्लभ दस्तावेज सुरक्षित हो, तो वे उसे सरकार के साथ साझा करें ताकि उसे नष्ट होने से बचाया जा सके। उन्होंने अंत में जोर देते हुए कहा:

“अपनी ऐतिहासिक पांडुलिपियों और ज्ञान को बचाना, असल में अपने भविष्य की नींव को मजबूत करना है। जब हमारी युवा पीढ़ी इस ज्ञान से समृद्ध होगी, तभी भारत वर्ष 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने के अपने संकल्प को सिद्ध कर पाएगा।”

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