Report: Neha gupta
Bhojpur बिहार सरकार और कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे तमाम जागरूकता अभियानों और सख्त चेतावनियों के बावजूद भोजपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में पराली (फसल अवशेष) जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के पीरो अनुमंडल और आसपास के क्षेत्रों में किसान प्रशासनिक रोक की परवाह किए बिना खेतों में खुलेआम आग लगा रहे हैं। अधिकारियों की ढुलमुल कार्रवाई के कारण धरातल पर सरकारी आदेश पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
Bhojpur मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को पहुंच रहा है भारी नुकसान
Bhojpur कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने खेतों में फसल अवशेष जलाने को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- घट रही उर्वरा शक्ति: पराली में आग लगाने से जमीन की ऊपरी सतह का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे मिट्टी में मौजूद केंचुए और अन्य अत्यंत लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेतों की प्राकृतिक उत्पादक क्षमता (फर्टिलिटी) धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
- बढ़ रहा है वायु प्रदूषण: बड़े पैमाने पर खेतों से निकलने वाले घने धुएं के कारण पूरे इलाके में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। हवा में घुलता यह धुआं आसपास के ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए सांस तथा आंखों से जुड़ी बीमारियों का सबब बन रहा है।
Bhojpur सरकारी योजनाओं से वंचित करने की चेतावनी भी बेअसर
कृषि विभाग ने पराली प्रबंधन को लेकर पहले ही कड़े दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं। विभाग की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि यदि कोई किसान अपने खेत में फसल अवशेष जलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कृषि योजनाओं (जैसे बीज, खाद पर सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि) के लाभ से हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट या वंचित कर दिया जाएगा। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर उचित मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षण न होने के कारण किसानों के बीच इस दंडात्मक कार्रवाई का कोई डर नहीं दिख रहा है।
Bhojpur फसलों को नुकसान और सड़क हादसों की बढ़ी आशंका
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में बेलगाम लगाई जा रही यह आग अब सामूहिक संकट बनती जा रही है। कई बार हवा के तेज झोंकों के कारण पराली की यह आग अनियंत्रित होकर पड़ोसी किसानों के खेतों तक पहुंच जाती है, जिससे खड़ी या कटी रखी फसलें जलकर राख हो रही हैं। इसके अलावा, खेतों से उठकर सड़कों तक आने वाले घने धुएं के कारण दृश्यता (Visibility) काफी कम हो जाती है, जिससे ग्रामीण मार्गों और हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।





