Minimum Salary MP : सरकार ने बनाई न्यूनतम वेतनमान देने की नीति, MP में 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी
Minimum Salary MP : मध्य प्रदेश में 10 साल से ज्यादा वक्त तक काम कर रहे संविदा कर्मियों को अब उनका हक मिल पाएगा..जबलपुर हाई कोर्ट ने संविदा कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने का आदेश दिया है….कोर्ट ने साफ कहा कि एक दशक से ज्यादा वक्त से अनुबंध, आउटसोर्स और अंशकालिक आधार पर लगे संविदा कर्मचारी वर्गीकरण और लाभों के हकदार हैं….और उनके पदों के अनुरूप न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए..अलग अलग विभागो में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं..उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं को सात जुलाई, 2009 के एक आदेश पर अनुबंध के आधार पर नियुक्ति दी गई थी..और 30 जुलाई, 2009 को नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे…इसके बाद याचिकाकर्ताओं की सेवाएं विभाग ने जारी रखी हैं….
Minimum Salary MP : राज्य सरकार ने कर्मचारियों को स्थायी के रूप में वर्गीकृत करने और उन्हें उनके पदों के लिए न्यूनतम वेतनमान देने की नीति बनाई है….लेकिन अभी तक कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है….क्योंकि नियमितीकरण में भेदभाव किया जा रहा है… जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के प्रावधानों का उल्लंघन है…ऐसे कर्मचारियों को वर्गीकरण और इससे जुड़े लाभ मिलने चाहिए…और उन्हें दूसरे कर्मचारी की तुलना में कम वेतन देना उचित नहीं है…सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं को नीति के तहत वर्गीकरण का लाभ दिया जाना चाहिए और उनके पदों के अनुरूप न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए….कोर्ट ने अधिकारियों को 2016 की नीति के तहत याचिकाकर्ताओं को वर्गीकृत करने और सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए हैं.. .प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी हैं… जिसमें करीब ढाई लाख संविदा कर्मचारी हैं….बिजली विभाग में करीब डेढ़ लाख और सरकारी विभाग में 1 लाख आउटसोर्स कर्मचारी है..जिन्हें अब न्यूनतम वेतन समेत दूसरे लाभ मिलने की उम्मीद जगी है…
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