Report: Ratan kumar
Jamtara जामताड़ा नगर पंचायत की बहुप्रतीक्षित पहली बोर्ड बैठक सोमवार को शुरू होने से पहले ही विवादों के भंवर में फंस गई। सुबह 11 बजे निर्धारित इस बैठक को बिना किसी कार्यवाही के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। विवाद की मुख्य वजह बैठक में जनप्रतिनिधियों के ‘पतियों और रिश्तेदारों’ के प्रवेश को लेकर रही।
Jamtara नियमों पर टकराव: जनप्रतिनिधि बनाम कार्यपालक पदाधिकारी
बैठक शुरू होने से ठीक पहले उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब कुछ महिला वार्ड पार्षदों के पति और उनके अन्य रिश्तेदार बैठक कक्ष में प्रवेश करने की कोशिश करने लगे।
- प्रशासनिक रुख: कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी नियमावली के अनुसार बोर्ड की बैठक में केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही बैठ सकते हैं। उन्होंने बाहरी व्यक्तियों और ‘पार्षद पतियों’ की उपस्थिति को नियमों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध किया।
- पार्षदों का तर्क: वहीं, कुछ पार्षदों का तर्क था कि उनके समर्थकों और प्रस्तावकों को दर्शक दीर्घा (Visitor Gallery) में बैठने की अनुमति दी जानी चाहिए थी, जिसे प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया।
Jamtara बैठक का बहिष्कार और सदन से बाहर निकले पार्षद
कार्यपालक पदाधिकारी के कड़े रुख से नाराज होकर नगर पंचायत अध्यक्ष और कई वार्ड पार्षदों ने बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया। पार्षदों का आरोप था कि उन्हें और उनके सहयोगियों को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है। विरोध स्वरूप सभी पार्षद बैठक कक्ष से बाहर निकल गए, जिसके चलते सदन की कार्यवाही शुरू ही नहीं हो सकी।
Jamtara विकास कार्यों पर लटका ताला
इस पहली बैठक में शहर की सफाई, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगनी थी। लेकिन हंगामे के कारण फिलहाल जामताड़ा नगर पंचायत की विकास योजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच यह गतिरोध कब तक खत्म होता है।
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