Nepal: नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों नेताओं पर पिछले साल सितंबर में हुए Gen-Z विरोध प्रदर्शनों को कथित तौर पर दबाने के दौरान गैर-इरादतन हत्या से जुड़ा मामला दर्ज है।
Nepal: सुबह-सुबह घर से हिरासत में लिए गए नेता
जानकारी के मुताबिक, ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। वहीं, रमेश लेखक को भी तड़के करीब 5 बजे सूर्यविनायक स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया।
Nepal: नई सरकार बनने के तुरंत बाद कार्रवाई
यह गिरफ्तारी बालेन शाह के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के महज 24 घंटे के भीतर हुई है। बालेन शाह ने हाल ही में हुए आम चुनावों में बड़ी जीत दर्ज कर शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद संभाला था। यह चुनाव Gen-Z आंदोलन के बाद पहली बार कराया गया था।
Nepal: 10 साल तक की सजा का प्रावधान
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में दोनों नेताओं पर ऐसे आरोप लगाए जा सकते हैं जिनमें अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। यह कार्रवाई गृह मंत्रालय में दर्ज शिकायत और उसके बाद हुई जांच के आधार पर की गई है, जिसके तहत गिरफ्तारी वारंट जारी हुए।
Nepal: आयोग की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम पूर्व विशेष अदालत के न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। आयोग ने आपराधिक लापरवाही के आरोप में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की थी।
Nepal: इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश
आयोग की रिपोर्ट में कई प्रमुख नाम शामिल हैं-
- चंद्र कुबेर खापुंग (पूर्व पुलिस महानिरीक्षक)
- गोकर्ण मणि दवाड़ी (तत्कालीन गृह सचिव)
- राजू आर्यल (सशस्त्र बल प्रमुख)
- हुतराज थापा (पूर्व राष्ट्रीय जांच विभाग प्रमुख)
- छबी रिजाल (काठमांडू के तत्कालीन मुख्य जिलाधिकारी)
Nepal: Gen-Z आंदोलन बना था बड़ा कारण
नेपाल में पिछले साल सितंबर में युवाओं द्वारा संचालित Gen-Z आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया था। इस दौरान हुई हिंसा और झड़पों में 77 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 2000 से अधिक लोग घायल हुए थे। बड़े पैमाने पर सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
Nepal: आंदोलन के बाद बदली थी सत्ता
इन प्रदर्शनों के चलते उस समय के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम व्यवस्था बनाई गई, जिसने 2 मार्च को आम चुनाव आयोजित कराए।





