Report: Sanjeev kumar
Bokaro मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अब बोकारो के रसोई घरों तक पहुँचने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की खबरों ने स्थानीय लोगों के बीच ‘पैनिक’ पैदा कर दिया है। बोकारो के चास स्थित गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग इस डर से पहले ही सिलेंडर स्टॉक करना चाहते हैं कि कहीं आने वाले दिनों में कीमतें आसमान न छू जाएं या सप्लाई पूरी तरह ठप न हो जाए।
Bokaro अफवाहों का बाजार गर्म: सुबह से ही कतारों में खड़े उपभोक्ता
चास स्थित एचपी गैस एजेंसी पर आज नजारा बदला हुआ था। गैस सिलेंडर लेने के लिए उपभोक्ता तड़के सुबह ही लाइन में लग गए। गैस लेने पहुंचे लोगों का कहना है कि जिस तरह से ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध की स्थिति बनी हुई है, उससे गैस संकट पैदा होना तय है। कई उपभोक्ताओं ने मौजूदा स्थिति के लिए वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को जिम्मेदार ठहराया। लोगों को डर है कि गैस की डिलीवरी में देरी होगी, इसलिए वे अपनी बारी का घंटों इंतजार करने को तैयार हैं।
Bokaro एजेंसी प्रबंधन की सफाई: ‘सप्लाई सामान्य है, घबराने की जरूरत नहीं’
भीड़ और पैनिक को देखते हुए गैस एजेंसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि लोग अफवाहों और भविष्य की आशंकाओं के कारण बड़ी संख्या में एजेंसी पहुँच रहे हैं, जिससे व्यवस्था संभालने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नियमित रूप से रिफिल उपलब्ध कराई जा रही है और अनावश्यक पैनिक से बचना चाहिए।
Bokaro वैश्विक युद्ध और स्थानीय अर्थव्यवस्था का कनेक्शन
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्तों को बंद करने की अपनी धमकी पर अमल करता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। बोकारो जैसे औद्योगिक क्षेत्र में गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी और सप्लाई चेन की बाधाओं को लेकर आम आदमी के साथ-साथ मध्यम वर्ग भी चिंतित है। प्रशासन अब इस बात पर नजर रख रहा है कि कहीं इस पैनिक का फायदा उठाकर कालाबाजारी न शुरू हो जाए।
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