संवाददाता: रतन कुमार
Jamtara नगर निकाय चुनावों की दस्तक के बीच जामताड़ा नगर पंचायत का वार्ड नंबर 4 (डेरासाल क्षेत्र) एक बार फिर सुर्खियों में है। विडंबना यह है कि नगर क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद यहाँ के हालात किसी पिछड़े गांव से भी बदतर बने हुए हैं। स्थानीय निवासियों का दर्द है कि वे टैक्स तो शहरी दे रहे हैं, लेकिन सुविधाएं आज भी ग्रामीण स्तर की ही नसीब हो रही हैं।

जल संकट और बदहाल ड्रेनेज: कागजों तक सीमित स्वच्छता अभियान
Jamtara डेरासाल में पीने के पानी की किल्लत एक स्थायी समस्या बन चुकी है। क्षेत्र के अधिकांश चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे महिलाओं को लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता है। सफाई व्यवस्था का हाल यह है कि नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण रास्तों पर गंदा पानी जमा रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत का स्वच्छता अभियान इस इलाके में केवल कागजी घोड़ों तक ही सीमित है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
स्ट्रीट लाइट का अभाव: शाम ढलते ही अंधेरे के साये में गलियां
Jamtara नगर क्षेत्र होने के नाते यहाँ की गलियां रोशनी से सराबोर होनी चाहिए थीं, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। वार्ड की अधिकांश स्ट्रीट लाइटें या तो तकनीकी खराबी का शिकार हैं या फिर कभी जलती ही नहीं। पर्याप्त रोशनी न होने के कारण रात के समय आवागमन असुरक्षित हो गया है, जिसका सबसे बुरा असर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

चुनावी वादों की कसौटी पर विकास: प्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल
Jamtara वार्डवासियों का सीधा आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की सक्रियता केवल ‘चुनावी मौसम’ तक ही सीमित रहती है। चुनाव नजदीक आते ही खराब चापाकल रातों-रात ठीक होने लगते हैं और सफाई कर्मी भी नजर आने लगते हैं, लेकिन मतदान खत्म होते ही व्यवस्था फिर से पटरी से उतर जाती है। हालाँकि, चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी इन देरी के पीछे प्रशासनिक और तकनीकी कारणों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन इस बार का मतदाता केवल ठोस काम और स्थायी समाधान की शर्त पर वोट देने का मन बना चुका है।
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