Report: Ratan patel
Chitrakoot । वर्तमान समय में जहां अभिभावकों के बीच अपने बच्चों का दाखिला महंगे निजी स्कूलों में कराना ‘स्टेटस सिंबल’ बन चुका है, वहीं चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक ऐसी नजीर पेश की है जो न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास जगाने वाली भी है।
आचरण से दी ‘शिक्षा’: अपनी बेटी सिया का कराया नामांकन
Chitrakoot जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने सरकारी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के केवल निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि स्वयं उदाहरण बनकर सामने आए। उन्होंने धनुष चौराहा स्थित कंपोजिट विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में अपनी पुत्री सिया का नामांकन कराया। जब जिले का प्रथम नागरिक स्वयं अपनी संतान को आंगनबाड़ी में भेजने का निर्णय लेता है, तो यह सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर मुहर लगाने जैसा है।
“दिखावे की दौड़ छोड़ सरकारी व्यवस्था पर करें भरोसा”
Chitrakoot नामांकन के बाद जिलाधिकारी ने आम जनता, सरकारी कर्मचारियों और अभिभावकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भोजन वितरण का स्थान नहीं है, बल्कि यहां बच्चों के प्रारंभिक मानसिक विकास, खेल, शिक्षा और पोषण की बेहतरीन व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने अपील की कि लोग दिखावे और भारी-भरकम फीस वाली होड़ से बाहर निकलकर सरकारी आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों पर विश्वास जताएं।
व्यवस्था में सुधार और कार्यकर्ताओं के बढ़े हौसले
Chitrakoot डीएम के इस कदम से न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि सरकारी तंत्र किसी भी निजी संस्थान से कमतर नहीं है। स्थानीय लोगों के बीच इस निर्णय की चर्चा है और माना जा रहा है कि इससे सरकारी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति और गुणवत्ता में सुधार आएगा। पुलकित गर्ग का यह सकारात्मक दृष्टिकोण समाज को एक नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है।





